नैनीताल:11 मार्च 2018

भारत में वीआईपी कल्चर को पीचे छोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों की गाड़ी पर लगी बत्ती पर वार किया।  इस फैसले के बाद सभी नेताओं, जजों तथा सरकारी अफसरों की गाडि़यों से लाल बत्ती हटाने का निर्णय लिया है। इनमें राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, राज्यों के मुख्यमंत्री व मंत्री तथा सभी सरकारी अफसरों के वाहन शामिल हैं। अब केवल एंबुलेंस, फायर सर्विस जैसी आपात सेवाओं तथा पुलिस व सेना के अधिकारियों के वाहनों पर नीली बत्ती लगेगी। लेकिन फैसला लागू होने के बाद भी कई अफसरों का बत्ती के प्रति प्यार कम नहीं हो रहा है। इसका उदाहरण नैनीताल में देखने को मिला। जहां यूपी पुलिस के एक अफसर की गाड़ी पर लगी नीली बत्ती को नैनीताल पुलिस ने उतरावा दिया।

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मामला शनिवार का है। कोतवाली पुलिस ने कार से नीली बत्ती उतारने के साथ ही चालक का पुलिस एक्ट में चालान कर दिया। जानकारी के मुताबिक कार उत्तर प्रदेश पुलिस के मेरठ में तैनात डिप्टी एसपी की थी। दरअसल शनिवार को एसएसपी जन्मेजय खंडूरी कालाढूंगी रोड से रामनगर जा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने नैनीताल की ओर नीली बत्ती गाड़ी जाते हुए देखी। कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होता देख एसएसपी ने वायरलैस से मल्लीताल कोतवाली पुलिस को इस बारे में बताया और एक्शन लेने के निर्देश दिए। इसकके बाद कोतवाल विपिन चंद्र पंत, चौकी प्रभारी भावना बिष्ट बारापत्थर पहुंच गए और नीली बत्ती लगी होंडा सिटी कार संख्या यूपी-16पी, 6975 को रोक लिया और चालक अंजार अहमद पुत्र रईस अहमद निवासी रामनगर का पुलिस एक्ट में पांच सौ रुपये का चालान कर दिया। पुलिस के अनुसार कार में बैठे व्यक्ति ने खुद को मेरठ का डिप्टी एसपी बताया। नीली बत्ती उतारने के बाद कार को छोड़ दिया गया।बता दें कि वीआईपी कल्चर को पीछे छोड़ने का फैसला मोदी सरकार द्वारा साल 2017 में लाया गया। इस फैसले की सुप्रीम कोर्ट ने भी तारीफ की और इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया।