हल्द्वानी। उत्तराखण्ड में कई चीजों का अभाव है। पिछले कुछ सालों में शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है लेकिन स्वास्थ्य व चिकित्सा ढांचा किसी बुरे सपने की तरह है। शहरों में तो सुविधाए मिल जाती है लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा के नाम पर खोले गए अस्पताल केवल नाम के लिए है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार  हैलो एम्बुलेंस सेवा शुरू करने वाली है।  इसके लिए  हैलो एम्बुलेंस  के लिए कंपनी के चयन का काम भी शुरू कर दिया गया है। इस सेवा के शुरू होने के बाद आपातकाल की स्थिति में मरीजों को तुरंत अस्पताल  पहुंचाया जाएगा। गौरतलब है कि पर्वतीय स्थानों से मरीजों को अस्पताल ले जाने की सुविधा में कमी के वजह से कई लोगों की ज़ान चले जाती है।

इस मुद्दे को पर गंभीरता देखाते हुए सोमवार को सीएम हरीश रावत स्वास्थ्य बीमा योजना की री लांचिंग के दौरान कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाए चिंता का विषय है और इसी को देखते हुए सरकार ने इस योजना का दायरा का दायरा बढ़ाया है। अब स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा 50 हजार से बढ़कर पौने 2 लाख कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हैलो एम्बुलेंस सेवा के शुरू हो जाने से दूर दराज के मरीजों को समय से अस्पताल ले जाया सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में लोकल कनेक्टिविटी की जिम्मेदारी भी हैलो एम्बुलेंस सेवा देने वाली कंपनी को ही मिलेगी।

स्वास्थ्य बीमा योजना के री लांचिंग के दौरान मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि  इस योजना से 15 लाख परिवारों को फायदा मिलेंगा। इस योजना के तहत गंभीर बिमारी से ग्रस्त मरीज को  पौने 2 लाख मुफ्त इलाज मिलेगा। सरकारी अस्पतालों के साथ 61 प्राइवेट अस्पतालों को भी इय योजना का अंग बनाया जाएगा। एम्स, मैक्स,वेदांता के अलावा कई बड़े अस्पतालों का नाम इय योजना की सूची में होगा।

इसके साथ ही इस योजना के लिए सरकार ने एक टोल फ्री नंबर 1800180120 भी जारी किया है। योजना को लेकर किसी भी जानकारी के लिए आप इस नंबर पर संपर्क कर सकते है। सीएम हरीश रावत ने कहा कि पहाड़ो में डॉक्टरों की कमी के वजह से राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की हालात खराब है।सीएम हरीश रावत के साथ मौजूद स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह ने कहा कि अस्पतालों के सुधार के लिए बीडीएस,फार्मासिस्ट और एएनएस की भर्ती की मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को अपने आराम से पहले लोगों के दर्द को देखना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे एक माह के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं के सुधारने के लिए कठोर कदम उठाए।