नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि उन्हें गौरक्षा पर अपने बयानों को कार्य रूप में परिणत चाहिए। ओवैसी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान में देरी पर सवाल उठाया और कहा कि सिर्फ कुछ शब्द काफी नहीं होंगे। मोदी को दलितों और मुसलमानों में असुरक्षा के भाव को हटाना पड़ेगा।

रधानमंत्री ने शनिवार को गौरक्षकों पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि असामाजिक तत्व गौरक्षकों का मुखौटा लगाए हुए हैं।ओवैसी ने कहा कि इन घटनाओं से जुड़ी सभी गौरक्षक समितियां संघ परिवार से जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री को कार्रवाई करनी चाहिए।उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि क्या ये महज कुछ शब्द हैं। प्रधानमंत्री को राज्यों में अपने ही लोगों, अपनी पार्टी और भाजपा सरकारों पर लगाम लगानी होगी।”ओवैसी ने यह भी कहा कि मोदी को 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान अपने गुलाबी क्रांति के बारे में दिए भाषणों पर दोबारा गौर करना चाहिए।ओवैसी ने प्रधानमंत्री से पूछा कि उन्हें इस मुद्दे पर बोलने में इतना समय क्यों लगा।ओवैसी ने कहा, “जब अखलाक को मारा गया, प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। झारखंड में दो मुसलमानों को मारने की घटना पर भी वह चुप रहे। जम्मू के एक ट्रक चालक की मौत की खबर पर भी प्रधानमंत्री चुप रहे।”उन्होंने कहा कि गुजरात के उना में दलितों पर उत्पीड़न का वीडियो देश के घर-घर तक पहुंच गया है, इसलिए प्रधानमंत्री को मजबूरन बोलना पड़ा है।ओवैसी ने कहा कि ये सभी घटनाएं उन राज्यों में हुई हैं जहां भाजपा सत्ता में है या संगठनात्मक रूप से मजबूत है।