हल्द्वानी : केदारनाथ में आई तबाही को उत्तराखण्ड अभी तक भुला नहीं है । इसी को देखते हुए सीमांत गांवों में आपदा के दौरान गांव के महिला मंगल दल और युवक मंगल दल बनाए जाएंगे। इसके लिए एसडीआरएफ की टीम इन दलों को आपदा से निपटने के गुर सिखाएगी ।

राज्य में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने को लेकर एसडीआरएफ(स्टेट डिजास्टर रिलीफ फोर्स) ने काम करना शुरू कर दिया है। जौलीग्रांट स्थित मुख्यालय में इन दिनों आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अभी हरिद्वार जिले में बाढ़, जलभराव, अग्निकांड, भूकंप जैसी आपदा से निपटने के लिए 200 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण आने वाली बारिश के दौरान जलभराव से निपटने में मददगार साबित होगा। इसके बाद एसडीआरएफ ने सीमांत जनपद में बर्फबारी और बारिश के दौरान आने वाली आपदा से निपटने का प्रशिक्षण देने की कार्ययोजना बनाई है।

प्रथम चरण में प्रशिक्षण के लिए सीमांत जनपद उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ को इस योजना में शामिल किया गया है। यहां महिला मंगल दल और युवक मंगल दल को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। हर जिले के अलग-अलग विकासखंडों से चयनित दलों को जौलीग्रांट में 10-10 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है। अप्रैल तक यह प्रशिक्षण संपन्न हो जाएंगे। इसके लिए दलों के सदस्यों को आपदा के दौरान बचाव, खोज, राहत और अन्य मुसीबतों से निपटने के गुर सिखाए जाएंगे। सीमांत जनपदों के बाद आपदा प्रभावित जिलों में इस कार्यशाला की शुरुआत की जाएगी।

आपदा प्रबंधन को लेकर महिला और युवक मंगल दलों को प्रशिक्षण की कार्ययोजना बनाई गई है। अप्रैल महीने तक तीन सीमांत जनपदों में यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को आपदा के दौरान मदद दी जा सकेगी ।

 

एसडीआरएफ की टीम को आधुनिक उपकरण खरीदने एवं प्रशिक्षण देने के लिए व‌र्ल्ड बैंक से 50 करोड़ रुपये की मदद मिली है।