हमदोनों का रिस्ता
कश्मीर की
हसीन वादियों
के बर्फीले
सपनों सा नहीं !
जो तूफानों के
आने से
ढह जाएगा !

ये तो
भावनाओं का वह
गर्म और ठंडा
मरुस्थल है

जहाँ तेरे
बीन की धुन
पर मैं
“कालबेलिया नृत्य”
कर रही हूँ !