हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों ने एक बार फिर विवाद को जन्म दे दिया है। इस बार बीए प्रथम वर्ष में लगभग 22 हजार छात्र फेल हो गए जिससे हर कोई सकते में है। इस वर्ष 44,665 छात्रों ने बीए के फार्म भरे थे उनमें से 52 प्रतिशत छात्रों के फेल होने से एक बार शिक्षा प्रणाणी की पोल खुल गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय में इस तरह के परिणाम आने से गड़बड़ी की बू भी आ रही है। परिणाम में बच्चों को उस विषय में फेल किया गया है जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नही। इस वर्ष कुमाऊं विश्वविद्यालय की परीक्षा 6 अप्रैल से शुरू होकर जून में समाप्त हुई थी। गड़बड़ी का शिकार हुए छात्रों ने हल्द्वानी स्थित एमबीपीजी कॉलेज में शिकायत दर्ज की छात्रों के अनुसार जिस विषय की परीक्षा उन्होंने दी ही नही तो उस विषय में उन्हें कैसे फेल किया जा सकता है?

खराब रिजल्ट आने से छात्रसंघ चुनाव लड़ रहे छात्रों को जोरदार झटका लगा है। चीफ प्राक्टर डॉ. आरएस भाकुनी ने कहा कि अगर कोई छात्र प्रथम वर्ष फेल है या उसकी बैक है तो वो ना ही चुनाव लड़ सकता है ना ही वोट दे सकता है। छात्रनेताओं ने बीए प्रथम वर्ष के परिणाम के सुधार के लिए कॉलेज प्रशासन को ज्ञापन सौपा। कुमाऊं विश्वविद्यालय के नियंत्रक डॉ.रजनीश पांडे ने कहा कि हो सकता है कि परिणाम में गड़बड़ी हो। यदि किसी छात्र को लगता है कि उसको गलत नंबर दिए गए है तो वो इसकी जानकारी अपने कॉलेज में दे। विश्वविद्यालय जल्दी ही उससे सुधारने की कोशिश करेंगा। फेल हुए छात्रों के आंकड़ो के ऊपर नज़र डाले तो एमबीपीजी कॉलेज सबसे अधिक छात्र फेल हुए उसके बाद डीएसबी परिसर नैनीताल और तीसरे नंबर पर एसएसजे परिसर अल्मोड़ा रहा। कुमाऊं विश्वविद्यालय में परिणामों  में गड़बड़ी का विवाद होना आम बात है। कॉलेज प्रशासन की गलती का भुगतान छात्रों को करना पड़ता है।कई छात्र इस दवाब को संभाल नही पाते है और कोई गलत कदम उठा लेते है। लेकिन कॉलेज प्रशासन मांफी मांग कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। ये कॉलेज का उत्तदायित्व है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ ना किया जाए जो अक्सर होता है।