उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से सारे देश में जाना जाता हैं पुराणों के अनुसार देवताओ ने समय समय पर आकर लोगो को न्याय दिलाया है। ऐसे ही हमारे गोल्ज्यू देवता का भी अवतार माना गया है जिन्होंने लोगो को न्याय दिलाने के लिए अपने घर परिवार का त्याग कर दिया। जिन्हें लोग गुरिया के नाम से भी जानते है।

ऐसे हमारे गोल्ज्यू देवता को दुग्ध स्नान की परंपरा सालो से चलती आ रही है। इसी क्रम में घोड़ाखाल मंदिर में आज गोलज्यू देवता को दुग्ध स्नान कराया गया। हजारो भक्तो ने मंदिर पहुँचकर गोल्ज्यू के दर्शन किये। हर वर्ष की भाति इस वर्ष भी श्रावण मास में घोड़ाखाल गोलज्यू भगवान को दुग्ध स्नान कराया गया।

यहां भगवान को भोग लगाने या दुग्ध स्नान कराने की परंपरा सालो से आज भी चली आ रही हैं। यह परंपरा आज भी पहाड़ो में हर जगह देखने को मिलती है। रविवार को गोल्ज्यू देवता को दुग्ध स्नान कराया गया इसी दौरान दूध से बनी खीर का गोल्ज्यू को भोग लगाकर भक्तजनो को प्रसाद बांटा गया।

 

इस अवसर पर दूर दराज से भंडारे में प्रसाद पाने के लिए भक्तों का ताता लगा रहा। भारी बारिश के बावजूद लोगो ने गोल्ज्यू के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर पुरोहित रमेश जोशी का कहना था कि आज गोल्ज्यू को दुग्ध स्नान कराकर भंडारा आयोजित किया गया है। गोल्ज्यू के दर्शन करने के लिए उनके भक्त यहां पहुँच रहे है। भक्तो के आगमन के लिए सभी तैयारियां बारिश को देखते हुवे की हुई थी। भारी बारिश के चलते भक्त प्रसाद ग्रहण करने पहुँच रहे है। बताया कि इस बार पेड़ लगाने की नई प्रथा भी यहां शुरू की गई है। साथ ही उतिष चन्दन देवदार बाज के100 पेड आज मंदिर परिसर में लगाये गए है।