हल्द्वानी: मयंक सिंह नेगी: अभी कुछ ही दिन बीते है पर्यावरण दिवस का चारों तरफ शोर था,हर कोई पर्यावरण के प्रति चिंतित नजर आया। लेकिन ये चिंता और शोर 14 जून के बाद शांत है। इसी का परिणाम है कि आज 71 फीसदी वन भूभाग वाले उत्तराखंड में बीते नौ सालों में हरियाली जंगलो के बजाय कागजों में लहलहा रहीं है । 9 सालों में विभिन्न प्रजाति के हर साल औसतन दो करोड़ पेड़ रोपित किए गए। लेकिन फारेस्ट कवर मात्र इन 9 सालों में 46 फीसद ही हो पाया है। रोपें गए पौधों में से कितने जीवित है इसका आंकड़ा भी किसी के पास नहीं है।

वन विभाग की इस उदासीनता के कारण ही राज्य में फारेस्ट कवर बेहद कम है। जबकि हर साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण हो रहा है। सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक बीते 9 सालों में प्रदेश में 188081 हेक्टेयर क्षेत्र में विभागीय पौधरोपण के तहत 1381 लाख और वृहद पौधारोपण में 370 लाख पौधे लगाए गए। लेकिन व्यवस्था की असंवेदनशीलता व उदासीनता के कारण फारेस्ट कवर बेहद कम ही है। इसके अलावा रोपित पौधों की 5 सालों तक देखभाल नहीं होने के कारण पौधें बढ़े होने से पहले ही नष्ट हो जाते है। 9 सालों में रोपित लगभग 17 करोड़ से अधिक पौधों की देखभाल की भी उचित व्यवस्था व बजट की कमी के कारण हरियाली सिर्फ कागजों में ही नजर आती है,धरातल पर असलियत कुछ और ही है