प्रेम
परिपक्वता के साथ
समुद्र की 
गहराई भी
लांघ जाता है
डूबकर
खोज लाता है
हीरे-पन्ने-माणिक
करता है खेती
सीपियों की
और
जोहता है बाट
सीपियों के
मोतियों से
अलग होने की
जीवन भर
प्रेम -पथ पर
प्रेम -पथिक
बनकर
प्रेम ।