प्रेम
लेने नही
नि:स्वार्थ भाव से
देने का नाम है

वो जो ख़ुद से
कुछ खफा-खफा
से है !!!!!!!!
जरूर हमने ही
देने में कोई
कमी करी होगी ?

वरना वो तो
कमाल है
हमारे लिए
काबिले-इबादत
हर हाल है !!