नई दिल्ली: साइनस बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है। सही इलाज से इससे पूरी तरह राहत मिल सकती है। हल्द्वानी साहस क्लीनीक के डॉक्टर नवीन चंद्र पांडे ने बताया कि कुछ लोगों को हमेशा सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती है लेकिन इनमें से ज्यादातर मामले साइनोसाइटिस यानी साइनस के होते हैं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह क्या है? दरअसल, हमारी खोपड़ी में बहुत-सारी कैविटीज़ (खोखले छेद) होती हैं। ये हमारे सिर को हल्का बनाए रखने और सांस लेने में मदद करती हैं। इन छेदों को साइनस कहते हैं। अगर इन छेदों में बलगम भर जाती है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इस समस्या को ही साइनोसाइटिस कहते हैं। आम बोलचाल में इसे साइनस भी कहा जाता है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आते हैं या कहें कि हर साल इसके नए मामले आते हैं। जिन लोगों को एलर्जिक साइनस होता है, उन्हें पोलन सीजन और सर्दियों में स्मॉग होने पर समस्या बढ़ने का खतरा रहता है। पहले जुकाम और प्रदूषण की वजह से गले में खिचखिच पैदा होती है। इसी के साथ नाक बंद होना, नाक बहना और बुखार जैसी शिकायतें होने लगती हैं। अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें तो ये एक्यूट साइनस हो सकता है। अगर यह समस्या बार-बार होने लगे या तीन महीने से ज्यादा समय तक बनी रहे तो यह क्रॉनिक साइनस हो सकता है।

 

क्यों होता है
सांस लेने में रुकावट, नाक की हड्डी का बढ़ना और तिरछा होना, एलर्जी होना इसकी आम समस्या है यानी किसी भी कारण से साइनस के संकरे प्रवेश मार्ग में अगर रुकावट आ जाती है तो साइनस होता है। इसके अलावा कई बार खोखले छेदों में बलगम भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं। साथ ही, इन्फेक्शन के कारण साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। इस वजह से सिर, माथे, गालों और ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है। यह बीमारी खराब लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होती लेकिन जो लोग फील्ड जॉब में होते हैं यानी जो ज्यादा समय पल्यूशन में रहते हैं या फिर लकड़ी इंडस्ट्री आदि प्रफेशन से जुड़े होते हैं, उनको साइनस होने का खतरा ज्यादा होता है।

लक्षण
– सिर में दर्द और भारीपन
– आवाज में बदलाव
– बुखार और बेचैनी
– आंखों के ठीक ऊपर दर्द
– दांतों में दर्द
– सूंघने और स्वाद की शक्ति कमजोर होना
– बाल सफेद होना
– नाक से पीला लिक्विड गिरने की शिकायत