हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल होने को कुमाऊं का सबसे पड़ा निजी अस्पताल है। लेकिन यहां कि अव्यवस्था की स्थिति मरीजों के लिए खतरा बनी हुई है। इसी विषय में हल्द्वानी निवानी विकास भगत ने जनहित याचिका दायर की और हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उसे स्वीकार भी कर लिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ ने इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के साथ प्रदेश के चिकित्सा सचिव से भी जवाब मांगा है। अगली सुनावाई 12 अगस्त को होगी।

अपनी जनहित याचिका में विकास भगत ने कहा कि सुशीला तिवारी अस्पताल में कुमाऊं के साथ उत्तर प्रदेश के भी कई मरीज आते है लेकिन यहां व्यवस्था किसी भी रूप में मरीज के हित में नही है। इलाज के इस्तेमाल किए जानी वाली 28 मशाने खराब है और अस्पताल प्रशासन निंद में सो रहा है। शायद उन्हें मरीजों की जान से ज्यादा अपना आराम पसंद है। आधे से ज्यादा विभागों में डॉक्टरों की कमी है।अस्पताल  में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई लोगों की जान चले गई है।  सुनवाई के दौरान  संयुक्त खंडपीठ ने कहां कि इस प्रकार की स्थिति काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि अगर इसमें ठीक तरह से सुधार नही होता है तो प्रशासन को नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।