नई दिल्ली: गर्मियों को मौसम में कई तरह की बीमारियां सामने आनी है। देखने को मिलता है कि गर्मियों के वक्त छोटे बच्चों को बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती है। इस लिस्ट में हैजा भी है बच्चों के लिए काफी खतरनाक है। हल्द्वानी स्थित साहस होम्योपैथिक के डॉक्टर एनसी पांडे ने बताया कि हैजा, आंतों में इंफेक्शन होने वाली गंभीर बिमारी है। यह विब्रिओ कॉलेरी नामक बैक्टीरिया से फैलता है। आमतौर पर इस बिमारी की शुरुआत उल्टी या दस्त से होती है, लेकिन सही समय पर अगर इसका इलाज नहीं किया जाए तो जानलेवा भी हो सकता है।

उन्होंने बताया कि कई बार लोग शुरुआत में हैजा के लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं जिसकी वजह यह समस्या गंभीर हो जाती है। हैजा के शुरुआती अवस्था में उल्टी व दस्त की समस्या होती है। अगर आपको एक-दो बार से ज्यादा ऐसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करना चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए इसके लक्षणों, कारण और उपचार के बारें में जानें। उन्होंने हैजा से बचने के होम्योपैथिक वीडियो में कुछ दवाएं भी बताई हैं।

लक्षण

  • हैजे के बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं और जब पर्याप्त संख्या में हो जाते हैं तो वहां विष पैदा करते हैं, यह विष रक्त द्वारा शरीर के अन्य भागों में जाता है और रोग बढ़ता है।
  • इस रोग में जबरदस्त उलटियां व दस्त होते हैं। कई बार उलटी नहीं भी होती है और जी मिचलाता है व उलटी होने जैसा प्रतीत होता है।
  • उलटी में पानी बहुत अधिक होता है, यह उलटी सफेद रंग की होती है। कुछ भी खाया नहीं कि उलटी में निकल जाता है।
  • उलटी के साथ ही पतले दस्त लग जाते हैं और ये होते ही रहते हैं, शरीर का सारा पानी इन दस्तों में निकल जाता है। इस बीमारी में बुखार नहीं आता, बस रोगी निढाल, थका-थका सा कमजोर व शक्तिहीन हो जाता है।
  • इस रोग में प्यास ज्यादा लगती है, पल्स मंद पड़ जाती है, यूरिन कम आता है व बेहोशी तारी होने लगती है।
  • हैजा होने पर रोगी के हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं।
  • हैजे की शुरुआत होने पर रोगी की सांस टूटने लगती है.
  • यूरीन में समस्या होती है और पीले रंग का होता है.
  • रोगी की नाडी तेज चलने लगती है और कमजोर रहती है.
  • हैजा में ज्यादा बुखार नहीं होता, जैसा कि दूसरे इन्फेक्शन में होता है ।
  • हैजा में रोगी की हृदय गति बढ़ जाती है।