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दिल्ली:थिएटर फैस्टिवल में छाया हल्द्वानी का अस्तित्व ग्रुप

नई दिल्ली:राजू बोहरा: भारत विविधताओं का देश है यहाँ का हर राज्य हर प्रदेश अपनी किसी ना किसी खास विशेषताओं लिए जाना जाता है। इसमें हमारा राज्य उत्तराखंड भी पीछे नहीं है। देवभूमि उत्तराखंड के नाम से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध यह राज्य अपनी तमाम विशेषताओं लिए देश-विदेश में जाना जाता है। यहाँ के लोग अब कला के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर देश और दुनिया में अपनाउत्तराखंड राज्य का नाम रोशन कर रहे है जिसमे फिल्मटेलीविजन के अलावा रंगमच भी मुख्यरूप  से शामिल है।

गत साप्ताह राजधानी दिल्ली के एलटीजी सभागार” मंडी हाउस में 8 दिसंबर से 10 दिसंबर तक अभिव्यक्ति कार्यशाला” द्वारा 3 दिवसीय थिएटर फैस्टिवल उत्तराखंड नाट्य-शताब्दी नाट्योत्सव “आह्वान-2017″ का आयोजन किया गया। जिसका शुभारम्भ बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता व  उत्तराखंड फिल्म विकास बोर्ड” के उपाध्यक्ष हेमंत पांडेफिल्म-टीवी अभिनेता अभिनेता गोविन्द पांडे और ब्रजेन्द्र काला और उत्तराखंड में रंगमंच की आधारशिला रखने वाले प्रसिद्ध रंगकर्मी श्रीश डोभाल और  इस कार्यक्रम के आयोजक मनोज चंदोलाचारु तिवारी सहित कई हस्तियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड रंगमंच के पिछले 100 सालों का वृत्तिचित्र दिखाया कर की गई। 3 दिन तक चले इस महोत्सव में 6 नाटक प्रस्तुत किये गए 8 दिसम्बर को  संभव नाट्य मंच‘ देहरादून द्वारा महादेवी वर्मा की कहानी “लक्षमा” की बेहतरीन प्रस्तुति दी गयी जिसके निर्देशक थे अभिषेक मैंदोला।उसी दिन दूसरी प्रस्तुति पर्वतीय लोक कला मंच दिल्ली द्वारा दी गयी बारामासा”जिसके लेखक हेम पंत और निर्देशक गंगाधरभट्ट थे।

9 दिसंबर को भोर सोसाइटी रामनगर की प्रस्तुति “प्रतिध्वनि” जिसके लेखक मथुरादत्त मठपाल और निर्देशक संजयरिखाड़ी थे. इसी दिन अन्य प्रस्तुति दी गयी अक्षत गोपेश्वर की टीम ने “रंगयु बाखरू” जिसका निर्देशन किया था विजयवशिष्ठ ने और इसके लेखक थे जगत रावत।

10 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से संगीत नाटक अकादमी के मेघदूत सभागार में “उत्तराखंड रंगमंच दिशा और दशा”विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन भी किया गया साथ ही अभिव्यक्ति कार्यशाला द्वारा आयोजित उत्तराखंड नाट्य-शताब्दी नाट्योत्सव के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया जिसमे उत्तराखंड रंगमंच के जाने-माने रंगकर्मियों ने सहित फिल्म अभिनेता एवं उत्तराखंड फिल्म विकास बोर्ड” के उपाध्यक्ष हेमंत पांडे ने अपने विचार रखे. और सभी रंगकर्मियों ने एकजुट होकर रंगमंच को लोककलाओं से जोड़ने की बात कही।

सांयकाल में एलटीजी सभागार में शैलेश मटियानी जी की कहानी “दो दुखों का एक सुख” का बेहतरीन मंचन अस्तित्व ग्रुप हल्द्वानी द्वारा किया गया जिसका निर्देशन हरीश पाण्डे द्वारा किया गया. उसके बाद 3 दिवसीय नाट्य महोत्सव के आखिर में हाई हिल्लर ग्रुप दिल्ली की टीम ने गढ़वाली भाषा में दिनेश बिजल्वाण द्वारा लिखित “रुकमा-रुमैलो का मंचनकिया गया जिसके निर्देशक थे हरी सेमवाल. नाटक को सबसे अधिक सराहा गया।

उत्तराखंड नाट्य-शताब्दी नाट्योत्सव की एक विशेषता यह थी की इसमें फिल्म, थियेटर, टीवी, गीत, संगीत, खेल, राजनीति, सहित हर क्षेत्र के लोगो ने शिरकत की और इस फैस्टिवल में दिखाए गए उत्तराखंड के नाटकों का भरपूर आनंद भी लिए। फैस्टिवल में एक दिन बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष अजय भट्ट ने शिरकत कर आयोजकों का हौसला बढ़ाया। 

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