प्रकृति के गले लगिए और डिप्रेशन को कहिए बाय-बाय,उत्तराखंड में बन गया देश का पहला ऐसा सेंटर

अल्मोड़ा: आधुनिक जमाने में जिंदगी आगे जरूर बढ़ रही है। लेकिन एक बीमारी ऐसी भी है जो इस भाग दौड़ में विशाल रूप ले रही है। डिप्रेशन नामक कीड़ा अब ना सिर्फ युवाओं बल्कि हर उम्र के व्यक्ति को परेशान कर रहा है। इतना ही नहीं बढ़ती आत्महत्याओं का मुख्य कारण भी डिप्रेशन ही निकल कर आ रहा है। लेकिन अब डिप्रेशन को प्रकृति के माध्यम से दूर किया जा सकेगा। भारत का पहला हीलिंग सेंटर उत्तराखंड में बनकर तैयार हो गया है।

उत्तराखंड में हमारे आसपास सुंदरता को महसूस करने के बहुत सारे मंजर हैं। लिहाजा यह बात तो हर कोई मानता है की प्रकृति से बेहतर सुकून कोई भी अन्य चीज इंसान को नहीं दे सकती। यही एक मुख्य कारण है कि लोग बड़े बड़े शहरों से पहाड़ों की तरफ भागते हैं। क्योंकि यहां उनके मन को, उनके दिमाग को शांति मिलती है।

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उत्तराखंड के रानीखेत में देश का पहला हीलिंग सेंटर बन गया है। इसका शुभारंभ रविवार को पर्यावरणविद जोगेंद्र बिष्ट ने किया। भारत का पहले हीलिंग सेंटर यानी वन उपचार केंद्र को कालिका में 13 एकड़ के चीड़ जंगल में बनाया गया है। इसे वन अनुसंधान केंद्र ने बनवाया है। यहां कुल मिलाकर 4 तरह की गतिविधियां होंगी जो मानसिक तनाव को दूर करने के साथ ही शरीर को स्वस्थ भी रखेंगी।

मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक तरह से वन एवं प्रकृति के आधार पर उपचार करने की एक तकनीक है। जिसमें मनुष्य की भावनाओं को प्रकृति से जोड़कर मानसिक और शारीरिक रूप से इंसान का उपचार किया जा सकेगा। सबसे खास बात तो यह है कि यहां उपचार कराने के लिए आपको किसी भी गार्ड या स्टाफ की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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हर गेट पर बोर्ड लगे होंगे। जिन पर तरह-तरह की विधियां लिखी होंगी। उपचार के बाद बकायदा रजिस्टर पर लोगों को अपने अनुभव दर्ज करने होंगे। अच्छी बात यह भी है कि बाहरी लोगों से प्रति व्यक्ति केवल ₹25 और स्थानीय लोगों से केवल ₹10 ही लिए जाएंगे। देखा जाए तो यह शुल्क फायदे के आगे नाम मात्र है। इसके अलावा सुबह 8:00 से शाम 6:30 बजे तक कि सेंटर में प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि आपको बता दें कि लोगों से कैमरा और मोबाइल बाहर छोड़कर आने की अपील भी की गई है। ताकि ध्यान लगाने के दौरान किसी का मन ना भटके।

इसमें चार तरह की गतिविधियां होंगी, जिससे मन को शांति मिल सकेगी :-

1. लोग पेड़ों से चिपकेंगे यानी पेड़ों को गले लगाएंगे। इससे रक्तचाप सामान्य होता है।

2. मानसिक तनाव से पार पाने के लिए जंगल में बने ट्री-हाउस में ध्यान लगाया जा सकेगा।

3. नंगे पांव नेटर वॉक करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी।

4. मानसिक शांति महसूस करने के लिए लोग जंगल में लेटकर आसमान को निहारेंगे। जिससे सुखद अनूभुति होगी।

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