टीम इंडिया के मेलबर्न टेस्ट जीतने के हैं कई मायने,एक जीत की कहानी

हल्द्वानी: हेमराज सिंह चौहान: टीम इंडिया को मेलबर्न में मिली जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण है। टीम इंडिया एडिलेड टेस्ट में मिली शर्मनाक हार के बाद भारी दवाब में थी। एडिलेड में पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपना न्यूनतम स्कोर 36 रन बनाए थे। बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच से पहले टीम इंडिया के लिए एक और बुरी खबर मोहम्मद शमी को लेकर आई। वो अब इंजरी की वजह से टेस्ट सिरीज से बाहर हो गए हैं। पहले टेस्ट की दूसरी पारी में बल्लेबाजी करते हुए उन्हें चोट आई थी। इसके अलावा टीम इंडिया के नियमित कप्तान और दुनिया के शानदार बल्लेबाज विराट कोहली भी पितृत्व अवकाश की वजह से आगे की सिरीज़ के लिए उपलब्ध नहीं थे। ईशांत शर्मा के बाहर होने से भारतीय पेस अटैक को पहले से झटका लगा हुआ था।

तूफानी बल्लेबाज रोहित शर्मा क्वारटीन होने की वजह से दूसरे टेस्ट में नहीं खेल सकते थे। इन चार महत्वपूर्ण खिलाड़ियों के एक साथ किसी टेस्ट में ना खेलने की वजह से टीम इंडिया के प्रदर्शन को लेकर अटकलें लग रही थी। अंजिक्य रहाणे की कप्तानी में टीम इंडिया ने दो खिलाड़ियों को डेब्यू कराने का फैसला लिया। इसमें ओपनर बल्लेबाज शुभमन गिल और तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज थे। उनके अलावा टीम इंडिया ने रिद्धिमान साहा की जगह ऋषभ पंत को मौका दिया। जडेजा को टीम में ऑलराउंडर के तौर पर जगह मिली। टीम इंडिया टॉस भी हार चुकी थी, लेकिन अगले चार दिनों में मैदान में जओ होने वाला था, उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।

टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को पहले दिन ही 200 रन के अंदर निपटा दिया। जसप्रीत बुमराह,उमेश यादव और टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की कमर ही तोड़ दी। इसके बाद खुद अंजिक्य रहाणे ने बल्लेबाजी की कमान संभाली और उनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने शानदार बल्लेबाजी की। जडेजा का जिक्र करना यहां जरुरी होगा क्योंकि उनकी और रहाणे की शतकीय साझेदारी ने मैच पर बड़ा असर डाला। इसके अलावा शुभमन गिल ने बतौर बल्लेबाज शानदार काम किया।

रिषभ और हनुमा विहारी ने कप्तान रहाणे के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां की और टीम के लिए महत्वपूर्ण रन जोड़े। दूसरी पारी में भी गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया को बड़ा स्कोर नहीं बनाने दिया और टीम इंडिया को 70 रन का लक्ष्य मिला। टीम इंडिया ने दो विकेट गंवाकर ये लक्ष्य हासिल किया और सिरीज में बराबरी कर ली। टीम इंडिया के लिए ये टेस्ट मैच बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि यहां हारने के बाद टीम इंडिया सिरीज तो नहीं जीत सकती थी और उस पर अगले दो टेस्ट मैचों को जीतकर सिरीज ड्रा कराने का बड़ा दवाब होता। इस मैच के हीरो अंजिक्य रहाणे रहे जिन्होंने मेलबर्न में अपना दूसरा शतक लगाया।

कप्तान के तौर पर ये कारनामा करने वाले वो अकेले भारतीय बल्लेबाज हैं। मेलबर्न में साल 2018 में भी भारत ने टेस्ट मैच जीता था। बुमराह और सिराज की परफोरमेंस ने टीम इंडिया मोहम्मद शमी की कमी नहीं खेलने दी। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी के दौरान उमेश यादव घायल होने के बावजूद इन दोनों ने अपना काम बखूबी निभाया। अश्विन ने एक बार फिर अपना जलवा दिखाया, जडेजा ने उनका पूरा साथ दिया और इंडिया के लिए गेंदबाज के तौर पर भी अपना योगदान दिया। टीम इंडिया की फ़ील्डिंग भी मेलबर्न टेस्ट में लाजवाब रही। उन्होंने एडिलेड वाली गलतियां नहीं दोहराई। अंजिक्य रहाणे की कप्तानी के तौर पर ये तीसरी जीत थी, उन्होंने अब तक तीन बार टेस्ट मैच में कप्तानी की है और तीनों बार टीम इंडिया को जीत दिलाई है।

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