बागेश्वर:ग्राम प्रधान के भाई की चमोली आपदा में मौत,इंजीनियर के पद पर थे दीपक कुमार

देहरादून: चमोली में आई आपदा ने ना जाने कितने घरों के चिराग बुझा दिए हैं। 30 से ज्यादा शव बरामद कर लिए गए हैं और 35 मजदूरों के टनल में फंसे होने की बात कही जा रही है। वहीं कुछ लोगों के शव बरामद हुए हैं और पहचान भी सामने आई है। ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट में बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत बागेश्वर निवासी दीपक कुमार का शव बरामद हुआ है।

मंगलवार को चमोली आपदा में चलाए जा रहे रेसक्यू अभियान के दौरान कांडा तहसील भतौड़ा गांव के दीपक कुमार का शव मिला है। इसकी सूचना मिलने के बाद उनके घर पर कोहराम मच गया है। रविवार को ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद से दीपक लापता चल रहे थे।

दो दिन मलबे में दबे रहने के बाद उनका शव पुलिस, आइटीबीपी की रेस्क्यू टीम को मिला। दीपक पिछले एक साल से जहां पर थे। इससे पहले वह उत्तर भारत हाइड्रो पावर कारपोरेशन लिमिटेड में इंजीनियर के रुप में कार्यरत थे।

परिजनों का कहना है कि दीपक की नाइट शिफ्ट थी। रविवार 7 फरवरी को सुबह करीब 8 बजे मोबाइल पर मैसेज आया था। उसके बाद कुछ देर परिजनों से बातचीत हुई।

दीपक ने परिजनों को बताया कि अब वह आराम करेंगे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सुबह सवा दस बजे चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा व धौलीगंगा नदियों ने जमकर तबाई मचाई। कुछ देर बाद परिजनों और दीपक का संपर्क टूट गया।

संपर्क नहीं होने से सोमवार को दीपक के बड़े भाई अरुण कुमार घटनास्थल को रवाना हुए और मंगलवार को उनका शव मिला। दीपक के पिता का नाम रमेश राम है। दीपक तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे।

अरुण कुमार भतौड़ा में ग्राम प्रधान हैं। अरुण कुमार की पत्नी चांदनी टम्टा बागेश्वर ब्लाक की कनिष्ठ प्रमुख हैं। तीसरे नंबर का भाई रोहित कुमार व्यापार का काम करता है। इस घटना के बाद पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

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