चमोली में ग्लेशियर टूटने से नहीं बल्कि अन्य कारणों के चलते आई आपदा,वैज्ञानिकों का अपडेट

देहरादून: चमोली के रैणी गांव में आई आपदा को लेकर इसरो के वैज्ञानिकों की ओर से आए अपडेट ने सभी को हैरान किया है। हादसे का कारण ग्लेशियर टूटना माना जा रहा था लेकिन ऐसा नहीं है। यह हम नहीं सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों को देखने के बाद वैज्ञानिकों ने आपदा की सच्चाई लोगों के सामने रखी है।

बता दें कि आज इसरो के वैज्ञानिकों के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बैठक की। इसके बाद उन्होंने बताया कि यह हादसा भारी मात्रा में बर्फ के पिघलने से हुआ । तापमान बढ़ने से बर्फ पिघली और यह हादसा हो गया। तस्वीरों के माध्यम से प्रारंभिक रूप से ये ही जानकारी सामने आई है। इस पर अध्ययन किया जा रहा है और इसके बाद ही अधिक जानकारी सामने आ पाएगी।

आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों की दो टीमें भी रवाना कर दी गई हैं। संस्थान की ओर से भेजे गए वैज्ञानिकों की टीमों में संस्थान के हाइड्रोलॉजिस्ट और जियोमार्फोलाजिस्ट शामिल हैं जो आपदा से जुड़े तमाम वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन करने के साथ ही इस बात का पता लगाएंगे कि ऋषिगंगा आपदा की वजह क्या रही।

डीजीपी अशोक कुमार भी रेस्क्यू पर अपनी नजरे बनाए हुए हैं। उन्होंने अपडेट दिया कि चमोली हादसे में अभी तक लगभग 202 लोगों के लापता होने की सूचना है। वहीं 19 लोगों के शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए है। चमोली जिला प्रशासन की पूरी टीम रविवार से ही क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों में लगी है। आपदा ग्रस्त इलाकों में जोशव मिलें, उनकी पहचान और पोस्टमार्टम जल्द हो इसके लिए अन्य जिलों से भी अधिकारियों को चमोली भेजा गया है।

एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी की टीम भी लोगों की खोज में लगी हुई है और 27 लोगों को बाहर निकालने में उन्हें कामयाबी भी मिली है। एनडीआरएफ के डीजी एसएन प्रधान ने कहा कि ढाई किलोमीटर लंबी सुरंग है और उसे करीब एक किलोमीटर तक खोल दिया गया है। 40 से 50 लोग अभी सुरंग में फंसे हुए हैं। शेष लोगों के मलबे में बह जाने की आशंका है। सभी मजदूरों की खोज की जा रही है। 

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