वाह, चंपावत की रेनू बोरा को बधाई, भारतीय कराटे एकेडमी ने बेटी को बनाया कोच

हल्द्वानी: अब शाबाशी सिर्फ बेटे नहीं बेटियां भी कमा रही हैं। घरों में महफूज तरह से रखी जाने वाली लड़कियां अब अब रौशनी फैला रही हैं। उत्तराखंड विशेष है, यहां की प्रतिभाएं विशेष हैं। अब देखिए ना, राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुकी चंपावत की बेटी रेनी बोरा को नेशनल कराटे एकेडमी इंडिया ने कितनी बड़ी जिम्मेदारी दी है।

लोहाघाट की रहने वाली रेनू बोरा अब हल्द्वानी को मार्शल आर्ट्स सिखाएगी। जी हां, नेशनल कराटे एकेडमी ने रेनू को यहां का कोच जो बना दिया है। बहरहाल जितनी बड़ी यह उपलब्धि है, इसके पीछे की कहानी और भी ज़्यादा बड़ी है।

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रेनू बोरा मूल रूप से चंपावत के लोहाघाट की रहने वाली है और वर्तमान में अपनी मां निलावती देवी के साथ हल्द्वानी में किराए में रहती है। यह पोस्टमैन पिता जोत सिंह की जौहरी वाली नज़र और उनका बेटी पर विश्वास था कि उन्होंने रेनू को बिना रोक-टोक मार्शल आर्ट खेल में ही आगे बढ़ने दिया। रेनू का बचपन गरीबी से भरा हुआ ज़रूर रहा मगर प्रोत्साहन की कमी कभी नहीं हुई।

इसी विश्वास और खुद की मेहनत की बदौलत रेनू ने ढेर सारी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं में भाग लिया। इतना ही नहीं 59वें राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद 60वें राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में कांस्य पदक जीतकर पिता की उम्मीदों पर खरी उतरती रही। मगर फिर एक अन्होनी हुई जिसने खुशियां भी छीन ली और खेल पर भी ब्रेक लगा दिए।

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2017 में पिता जोत सिंह की अचानक मृत्यु ने इस खिलाड़ी को हिला कर रख दिया। परेशान रेनू ने एक साल तक खेल का ख्याल तक अपने जहन में आने नहीं दिया। पारिवारिक स्थिति खराब हुई तो वह अपनी मां के साथ हल्द्वानी में रहने लगी। बेटी की पढ़ाई के लिए मां कर्ज लेती रही। बेटी भी रुद्रपुर की एक कंपनी में नौकरी कर मां का हाथ बंटाने लगी।

लेकिन भगवान भी हौसलों वालों की मदद करता है। रेनू ने दोबारा खेल में वापसी की तो आते ही बड़ा सम्मान मिल गया। नेशनल कराटे एकेडमी इंडिया के महासचिव एवं एशियन कोच सतीश जोशी ने रेनू को हल्द्वानी का कोच बनाकर उसका हौसला बढ़ाया है। बता दें कि रेनू ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई चंपावत से पूरी की जबकि वह अभी एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से एमए कर रही हैं।

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