हल्द्वानी: बढ़ती कॉम्पेटिशन व महत्वकांक्षा के चलते युवा तनाव के शिकार होने लगता है। तनाव के जन्म लेते ही उसका असर परिवार के माहौल में भी दिखता है जो उसे नकारात्मक सोच की तरह ले जाता है।

इसके चलते रोगी दूसरी की बातों को समझने के बजाए उसे अपने विरोध में लेते लगता है। मनसा स्वास्थ क्लीनिक मुखानी की मनोविज्ञानिक नेहा शर्मा कहा कि इस स्थिति में तनाव के रूप में रोगी के मन में नकारात्मक विचार पैदा हो जाते है। रोगी को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए साइक्लोजिकल उपचार कारगर रहता है।

लक्ष्यण

  • एंगाजाइटी पैनिक अटैक: अचानक घबराहट, दिल की गति तेज हो जाना, पसीना आना , छाती में दवाब, मुंह सूजना, गला बंद होना,सांस लेने में परेशानी होना,हाथ पैर कांपना , नींद ना आना। इस बीमारी से ग्रस्त रोगी को एक अचानक डर लगने की भावना होती है जो गंभीर शारीरिक प्रतिक्रियाओं को उत्तेजित करती है जबकि आपके आसपास कोई वास्तविक खतरा या स्पष्ट कारण नहीं होता है। पैनिक अटैक बहुत डराने वाले हो सकते हैं। जब पैनिक अटैक होते हैं, तो आप यह सोच सकते हैं कि आप नियंत्रण खो रहे हैं, आपको दिल का दौरा पड़ रहा है या आप मरने वाले हैं।
  • डिप्रेशन: दुःख, बुरा महसूस करना, दैनिक गतिविधियों में रुचि या खुशी ना रखना हम इन सभी बातों से परिचित हैं। लेकिन जब यही सारे लक्षण हमारे जीवन में अधिक समय तक रहते हैं और हमें बहुत अधिक प्रभावित करते हैं, तो इसे अवसाद यानि डिप्रेशन कहते हैं। इस स्थिति में रोगी को भूख नहीं लगती है , वो उदास रहता है, थकान ,उलझन, सिर में भारीपन चिड़चिड़ापन , गुमसुम रहना वजन गिरना , नींद ना आना आदि जैसी चीजे होती है।
  • मेनिया: गुस्सा, चीखना, भागदौड़, मारपीट,गाली गलौज, उछल कूद, अधिक बोलना,जिद्द करना, बढ़-चढकर बोलना व अधिक पूजापाठ करना।
  • आबसेसिव कंमपलसिव डिसऑर्डर: एक ही विचार बार-बार आना, ताला-कूंदी बार बार चैक करना,हाथ बार-बार धोना, चीजों को बार-बार उठाना व रखना, बार-बार गिनती करना आदि।
  • बच्चों के व्यवहारिक रोग: चीजे याद ना होना, ध्यान ना लगना, भूल जाना, बहाना मारना, सोशल मीडिया पर ्धिक वक्त बिताना, डर लगना, आत्मविश्वास की कमी आदि।

मखानी स्थित मनसा क्लीनिक की डॉक्टर नेहा शर्मा ने बताया कि कहा इस तरह के रोगों को मनोवैज्ञानिक तरीके से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस विधि से 25-30 साल से ग्रस्त रोगियों को भी ठीक किया है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति में रोगियों को कुछ  साइक्लोजिकल टेस्ट, साइक्लोजिकल कांउसिलिंग, साइकोथैरेपी,हिप्नोथैरेपी, फेममिली थैरेपी, राइटिंग थैरेपी, ग्रुप थैरेपी, रिलेक्सेशन थैरेपी एवं मनोविज्ञैनिक काउंसिलिंग के द्वारा जीवन भर के मानसिक रोगों को ठीक किया जा सकता है।