किसान सड़कों पर डटे रहे और बोले न ठंड का एहसास और ना ही अपने घर को छोड़ने का गम

दिल्ली: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ ‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत किसान सड़कों पर डटे हुए हैं। दिल्ली में पुलिस से झड़प, संघर्ष और आपसी टकराव के साथ शुरू हुआ किसानों का संघर्ष अब उत्सव में बदलता जा रहा है। दिल्ली गेट को हजारों किसानों ने अपना घर बना लिया है। दिल्ली में धरना दे रहे उत्तराखंड के किसानों का कहना है कि अब उन्हें न ठंड का एहसास होता और ना ही अपने घर को छोड़ने का गम। अब यहां लाखों किसान एक परिवार जैसा हो गया है। यहां अब हर तरफ उत्सव जैसा माहौल है। सड़क उनका बिस्तर बन गया है और आसमान बिछोना। धरने पर बैठे किसानों की मानें तो अब उन्होंने दिल्ली की सड़कों पर डटे रहने की इतनी व्यवस्था कर ली है कि कड़ाके की ठंड का सीजन तो दूर साल भर भी रहना पड़े तो कोई गम नहीं है।

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किसानों की ओर से लगाए गए टेंट में रोजाना करीब एक हजार लोगों का लंगर बनाया जा रहा है। किसान नेता अपने साथ हलवाई भी लेकर पहुंचे हैं, जो हर दिन अलग-अलग प्रकार का खाना बना रहे हैं। यही नहीं खाने के साथ रसगुल्ले और जलेबी आदि मिठाइयां भी बनाई जा रही हैं।  किसान नेता संजय चौधरी ने बताया कि वे अपने साथ ट्रैक्टर ट्राली में आटा, दाल, चावल, नमक, मिर्च मसाला समेत सब्जियां भी लेकर गए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक संघर्ष करना है तो खाने पीने का भी ध्यान रखना होगा।

सरकार यदि सोच रही है कि किसान हार थककर और मायूस होकर लौट जाए तो यह सरकार की सबसे बड़ी भूल साबित होगी। इधर किसान नेता विजय शास्त्री और विजय कुमार ने बताया कि उनके साथ कई बुजुर्ग किसान भी हैं। उनका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। नहाने के लिए पानी को गर्म करने के लिए भट्टियां रखी गई हैं। साथ ही वाशिंग मशीन में सभी के कपड़े धोए जा रहे हैं। सुबह का नाश्ता, दोपहर और शाम के खाने के अलावा बीच-बीच में चाय का इंतजाम भी किया जा रहा है।

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