हल्द्वानी: पिछले साल हल्द्वानी शहर को गोरापड़ाव हत्याकांड ने हिलाकर रख दिया था। सात महीने बाद भी पुलिस इस हत्याकांड में शामिल लोगों को पकड़ने में कामयाब नहीं हुई है। हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था लेकिन उसमें उसे खास सफलता नहीं मिली। इस बता दें कि गोरापड़ाव क्षेत्र में 26 अगस्त 2018 की रात महिला के घर में घुसकर डकैतों ने हमला बोल दिया था। महिला का कत्ल करने के साथ डकैतों ने बेटी को बुरी तरह से घायल कर दिया था।

 

इस हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की थी। युवक और युवतियों ने अवैध संबंधों और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के बारे में जानकारी दी थी। कामयाबी नहीं मिलने पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। इसके बाद सामने आ रहा है कि टेस्ट के बयानों के आधार पर कुछ और संदिग्ध लोगों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है। इस मामले में हाईकोर्ट ने भी हस्तछेप किया था।

कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी टीम गठित की गई। मुकदमे के विवेचक एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने इस मामले में चार संदिग्ध लोगों का रुद्रपुर में सीबीआई की टीम से पॉलीग्राफ टेस्ट कराया। सीबीआई ने टेस्ट की रिपोर्ट जिला पुलिस को भेज दी है ।रिपोर्ट में संदिग्धों के बयान के साथ विश्लेषण भी दर्ज है। रिपोर्ट में कुछ संदिग्धों के बारे में पुलिस को अहम जानकारी मिली है।

इसी आधार पर पुलिस ने बरेली और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ लोगों से पूछताछ की है।इस हत्याकांड के खुलासे के लिए आईजी कानून व्यवस्था दीपम सेठ भी हल्द्वानी पहुंचे थे। उन्होंने भी जल्द खुलासे की बात कही थी लेकिन दूसरे राज्यों में कोशिशों के बाद भी पुलिस को सफलता नहीं मिली। हत्याकांड का अभी तक खुलासा नहीं होने पर आईजी पूरन सिंह रावत ने गहरी नाराजगी जता चुके हैं।

 

 

 

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