दीवाली: हल्द्वानी की बेटियों की झालर, कनाडा की विख्यात कंपनी को दे रही है टक्कर

हल्द्वानी की गणपति इलेक्ट्रो एंड पावर कंपनी दे रही है क्षेत्र के युवक व युवतियों को रोज़गार के मौके। लाईट मालाएं बना कर लोग हो रहे हैं आत्मनिर्भर।

हल्द्वानी: देश भर में त्योहारों का सीज़न शुरू हो चला है। शारदीय नवरात्र के समापन के बाद अब देशवासी दीपों के पर्व दीपावली की तैयारियों में जुटना शुरू हो गए हैं। हर साल दीवाली पर लोग अपने अपने घरों को दीपों या ज़्यादातर झालरों से से रौशन करते हैं। जिसमें से अधिकतर झालरें वह होती हैं जिनका प्रोडक्शन बाहरी देशों से होता है। भारतीय जिन लाइट झालरों का इस्तेमाल त्योहारों में करते हैं, इनमें से ज़्यादातर का निर्माण चाइना में होता है।

गौर करने वाली बात यह है कि विदेशी कंपनियों को हर साल हमारे फेस्टिवल सीज़न से खासा फायदा होता है। लेकिन इस साल कहानी अलग रहने की पूरी उम्मीदें हैं। हमारे उत्तराखंड से एक और स्टार्टअप के बुलंदियों पर पहुंचने की खबर माहौल में खुशी व सकारात्मकता घोल रही है। हल्द्वानी के चकलुवा की एक कंपनी द्वारा स्वनिर्मित इलेक्ट्रॉनिक मालाएं इन दिनों खूब आकर्षण बंटोर रही हैं।

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हल्द्वानी की गणपति इलेक्ट्रो एंड पावर कंपनी बहुत कम रुपयों में अच्छी झालरों को बाज़ार में दे रही है। जिसकी वजह से लोगों को भी खासा फायदा होने की उम्मीदें हैं। दरअसल हल्द्वानी की यह कंपनी सीधे सीधे कनाडा की एक बहुप्रसिद्ध कंपनी को टक्कर दे रही है। कनाडा की यह कंपनी इलेक्ट्रिक के बाजार में काफी पुरानी है और उसी बाजार (भारत से बाहर) में उत्तराखंड की कंपनी अपने पैर पसार रही है l

बात भारत की करे तो चीनी कंपनी से बनी मालाएं रुपयों के मामले साल दर साल ऊंचाई पर निशाना साध रही हैं। दीपावली में इलेक्ट्रिक मालाओं का इस्तेमाल ज़्यादा होता है, इसीलिए यहाँ की कंपनियां भारत में अपना माल बेंच कर हर साल ऐश करती हैं।

लेकिन इधर भारत में भी कोरोना के बाद से ही आत्मनिर्भर बनने की ऐसी होड़ लगी है कि देश के साथ साथ शहरों व कस्बों में भी युवा स्वरोजगार खोजते दिख रहे हैं। बीना पंत की गणपति इलेक्ट्रो एंड पावर कंपनी में झालर निर्माण का सारा काम गांव की लड़कियां देखती हैं। हमारे यहां सारी इलेक्ट्रिक मालाओं को बहुत मज़बूती से बनाया जाता है। ऐसे में गुणवत्ता से लबरेज़ काम के साथ साथ इस कंपनी से गांवों की युवतियों को भी स्वरोजगार के बेहतर मौके मिल रहे हैं।

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बीना पंत ने बताया की झालरों की लड़ी बनाने का काम ज़्यादातर विदेशी कंपनी ही कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बहुत कम स्वदेशी कंपनी हैं जो इलेक्ट्रिक मालाओं के निर्माण का काम करना पसंद करती हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत का बना माल महंगा है क्योंकि हम भारतीय ही स्वदेशी सामानों को खरीदना पसंद नहीं करते हैं। हकीकत है कि भारत और भारतीय अपने दम पर कोई भी काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कंपनी को खड़ा करने का सबसे बड़ा मकसद इलाके के युवक व युवतियों को रोज़गार प्रदान करना था। उन्होंने बताया कि हमारी कंपनी सौ प्रतिशत भारतीय है और हमें इस बात पर गर्व है।

जानकारी के अनुसार गणपति इलेक्ट्रो एंड पावर कंपनी का माल विदेश जैसे जर्मनी, कनाडा, बेहरेन आदि में भी एक्सपोर्ट किया जाता था। लेकिन कोरोना के कारणवश इस साल एक्सपोर्ट नहीं हो पाया है। बीना पंत ने निर्माण करने वाली युवतियों की जमकर तारीफ की। बता दें कि कंपनी में बन रही झालरों की गारंटी दो साल की है। उनका मानना है कि कोरोना के कारण लोगों में अपनापन आया है मगर अब भी कुछ लोग हैं जो स्वदेशी सामान को तवज्जो ना दे कर चाईना या बाहर का माल खरीद-बेंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को साथ आना होगा एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देना होगा।

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