हल्द्वानी:हमारे जीवन में यूं तो प्रत्येक दिन खास है। पर दुनिया में हर विशेष व्यक्ति या विशेष घटना को खास सम्मान देने के लिए वर्ष का कोई एक दिन उन चुनिंदा व्यक्तित्वों के लिए समर्पित कर उन दिनों को ओर भी खास बना दिया जाता है।ऐसे ही हमारे जीवन की सबसे खास व्यक्ति ‘हमारी मां ‘ के समर्पण को चिन्हित करने के लिए हम मातृदिवस यानी मां का दिन मनाते हैं। पूरी दुनिया में मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है।हर जगह मातृ दिवस मनाने का तरीका अलग-अलग होता है, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही होता है।छोटे बच्चों में मां के प्रति प्रेम और सम्मान सदैव जीवंत रहे इसी उद्देश्य के साथ बरेली रोड स्थित श्रीपुरम स्थित EDU MOUNT इंटरनेशनल स्कूल में भी मातृदिवस मनाया गया।

शिशु का जब जन्म होता है, तो उसका पहला रिश्ता मां से होता है।मां और बच्चे का रिश्ता प्रगाढ़ और प्रेम से भरा होता है, कि बच्चे को जरा ही तकलीफ होने पर भी मां बेचैन हो उठती है। वहीं तकलीफ के समय बच्चा भी मां को ही याद करता है दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता।मां के प्रति इन्हीं भावों को बच्चों के मन में स्थापित करने के लिए EDU MOUNT इंटरनेशनल स्कूल में भी मातृ दिवस मनाया गया।यह दिन विशेष रूप से मां के लिए समर्पित कर बच्चों ने कार्डस् ,कविता और लघु भाषण के जरिए मां के प्रति अपना प्रेम और उत्साह प्रर्दशित किया।

स्कूल छोटा हो या बड़ा उसकी शिक्षा प्रणाली ही उसकी पहचान बनती है। बरेली रोड स्थित श्रीपुरम स्थित EDU MOUNT इंटरनेशनल स्कूल भी अपनी शिक्षा प्रणाली के कारण हल्द्वानी के विख्यात स्कूलों की लिस्ट में नाम दर्ज करा रहा है। स्कूल का मकसद बच्चों को अनुभव के साथ आगें बढ़ाने का है।स्कूल के प्रबंधक कर्नल संदीप सेन ने स्कूल की कार्यशैली पर बताया कि हमारा लक्ष्य बच्चों को प्रैक्टिल अनुभव के साथ आगे बढ़ाना है।स्कूल की शिक्षा प्रणाली IMAGINE (सोच),INVENT (खोज) और INSPIRING EXCELLENCE ( श्रेष्ठ बनना) के साथ आगे बढ़ती है। पढ़ाई के दौरान बच्चो की सोच काफी जरूरी है।

EDU MOUNT स्कूल मानता है कि बदलते परिवेष में इंसान अपने रिश्तों के प्रति नैतिक मूल्य खोता जा रहा है।खासकर जीवन की रूपरेखा तय करने वाले मां-बाप का महत्व ही लोग भूल जाते हैं।जिनकी बदौलत हम एक अच्छे इंसान की श्रेणी में आते हैं। इसलिए मातृदिवस को मनाना और भी आवश्यक हो जाता है। हम अपने व्यस्त जीवन में यदि हर दिन न सही तो कम से कम साल में एक बार मां के प्रति पूर्ण समर्पित होकर इस दिन को उत्सव की तरह मना सकते हैं।स्कूल छोटा हो या बड़ा उसकी शिक्षा प्रणाली ही उसकी पहचान बनती है। के विख्यात स्कूलों की लिस्ट में नाम दर्ज करा रहा है। स्कूल का मकसद बच्चों को मूल संस्कारों और नैतिक सिद्धांतों के साथ आगें बढ़ाने का है।इसी सोच को मार्गदर्शन बनाते हुए स्कूल में बच्चों को मानसिक, तर्क क्षमता, समझ, चरित्र निर्माण और आचरण विकास पर भी काम किया जाता है।