बाबा नीम करौली का कैंची मेला आज, धाम पर उमड़ा आस्‍था का सैलाब

हल्द्वानीः बाबा नीम करौली का कैंची मेला आज भवाली स्थित कैंची धाम में आयोजित किया जा रहा है। यहां भारी संख्या में देश और दुनियाभर से भक्त पहुंचे हैं। सुबह से ही यहां मंदिर के बाहर कई किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई है। कैंची धाम के लिए देश में ही नहीं, विदेशों में भी आस्था है। यही कारण है कि बाबा नीम करौली के भक्त शुक्रवार शाम से ही जमा होने शुरू हो गए थे। बता दें कि सुबह नौ बजे तक करीब दस हजार से अधिक भक्तों ने बाबा के दर्शन कर लिए थे। वहीं रात 12 बजे तक करीब 25 से 30 हजार भक्त यहां पहुंच चुके थे। शनिवार से ही बाबा नीम करौली महाराज के जयकारों से कैंची धाम गुंज उठा।

कैंची धाम मेले की शुरुआत वर्ष 1962 से हुई। संत नीम करौली महाराज ने यहां मंदिर स्थापित कर मेले की परंपरा शुरू की थी। बताया जाता है कि बाबा जन्म से ही संत थे। उन्होंने कई हनुमान मंदिर भी स्थापित कराए। उन्होंने पहला आश्रम कैंची (नैनीताल) तो दूसरा वृंदावन (मथुरा) में स्थापित करवाया। बाबा को हनुमान जी का अवतार भी कहा जाता है। बता दें कि बाबा ने वृंदावन में महासमाधि ली थी।


बाबा नीम करौली महाराज के अनगिनत भक्तों में से एक सरदार मान सिंह नागपाल को उनका सारथी कहा जाता है। मान सिंह 78 साल के हैं और हर साल मेले में पहुंचकर बाबा का ध्यान लगाते हैं। समिति प्रबंधक विनोद जोशी का कहना है कि  12 व 13 जून को अखंड रामायण, 14 को हवन यज्ञ व 15 को मुख्य मेला एवं भंडारा लगता है। इसमें परसाद के रूप में भक्तों को मालपुए दिए जातें हैं।

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एसएसपी सुनील कुमार मीणा का कहना है कि इस साल बाबा के दर्शन के लिए करीब 1.50 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके चलते पुलिस बल सुबह पांच बजे से कैंची क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात हो गई हैं। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक विनोद जोशी का कहना है कि मंदिर में आने-जाने के लिए अलग मार्ग बनाए गए हैं। वहीं रोडवेज के एआरएम का कहना है कि भवाली डिपो की जो बसें बाहर के स्टेशनों से आ रही हैं। उन्हें कैंची के लिए भेजा जा रहा है। नैनीताल, भवाली से कैंची के लिए अतिरिक्त बसें चलाई गई हैं। शनिवार से भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

बता दें कि बाबा के दर्शन के लिए फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स भी आ चुके हैं। मार्क ने कहा था कि वे स्टीव जॉब्स की सलाह पर बाबा के दर्शन करने के लिए मंदिर में आए थे। मार्क फेसबुक के शुरुआती कठिन दौर के चलते मंदिर में बाबा की प्रार्थना के लिये आये थे। जुकरबर्ग मानते हैं कि इस मंदिर में प्रार्थना के बाद से उनकी किस्मत बदल गई।