मोदी सरकार का देश को तोहफा, 80 हजार करोड़ रुपये वाले प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी

नई दिल्लीः भारत के गावों की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। ग्रामीण इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत देशभर के गांवों में करीब 1.25 लाख किमी लंबी सड़कें बनाने के प्रस्ताव रखा है।

कैबिनेट द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘इससे गांव-गांव को ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च प्राथमिक स्कूलों और अस्पतालों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।’  इस योजना पर शुरुआती दौर में 80,250 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसमें 53,800 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 26,450 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च करेगी।

बयान में कहा गया है, ‘यह फंड केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में खर्च किया जाएगा, हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों और 3 हिमालयी राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में यह अनुपात 90:10 का होगा।’

प्रधानमंत्री सड़क योजना के दो चरणों (PMGSY-I, PMGSY-II) और वामपंथी चरमपंथ वाले इलाकों में सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के तहत अब तक देश में कुल 5.99 लाख किमी सड़कों का निर्माण हो चुका है। साल 2018-19 का बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने PMGSY-III योजना शुरू करने की घोषणा की थी।

PMGSY-III के तहत अगले पांच साल में देश में सड़क संपर्क के मामले में एक तरह से कायाकल्प हो जाना है. सड़कों के निर्माण में इस बार बाजार, स्कूल और अस्पतालों तक पहुंच का ध्यान रखा जाएगा। अब मैदानी इलाकों में 150 मीटर ऊंचे और पहाड़ी इलाकों में 200 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण हो सकेगा, जबकि अभी तक मैदानी इलाकों में 75 मीटर और पहाड़ी इलाकों में 100 मीटर ऊंचे पुल का निर्माण होता था।

किसी राज्य में PMGSY-III लागू करने से पहले वहां की सरकार को केंद्र से एक एमओयू करना होगा जिसके द्वारा यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क निर्माण के पांच साल तक इनकी मरम्मत के लिए पर्याप्त धन हासिल किया जा सके।

साल 2014 मोदी सरकार के सत्ता में आने के समय तक देश में कुल 56 प्रतिशत ग्रामीण सड़कें पक्की थीं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि मोदी के शासनकाल में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का आकार तिगुना हो गया है।” ग्रामीण विकास मंत्रालय का दावा है कि मार्च-अप्रैल 2019 तक 95-97 प्रतिशत गांवों को सड़कों से जोड़ दिए जाने का लक्ष्य है।