महिला सशक्तिकरण केवल विज्ञापन में ,असल में होता है आशाओं का शोषण-वीडियो

हल्द्वानी: एक फिक्स मासिक वेतन की मांग को लेकर आश वर्कर्स ने हल्द्वानी में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने साफ किया है कि अगर सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है तो उन्हें आंदोलन करना पड़ेगा। स्कीम वर्कर्स यूनियनों व आशाओं के राष्ट्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर तीन दिवसीय हड़ताल दूसरे दिन यानी शनिवार को भी जारी रही। उन्होंने महिला अस्पताल हल्द्वानी में धरना-प्रदर्शन व कार्य बहिष्कार किया। इस अवसर पर ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के प्रदेश महामंत्री डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि कहा कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनी हुई आशा वर्कर्स ने कोरोना वायरस के दौर और लॉकडाउन में भी अपने फील्ड में स्वास्थ्य सेवा का कार्य कर रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के सारे काम, जनता के बीच में कोरोना वायरस के बारे में जनजागरूकता फैलाना, इस बात का प्रचार प्रसार करना कि कोरोना वायरस से बचाव कैसे किया जाए और अन्य जो भी कार्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित किये जा रहे हैं वे सारे कार्य आशाएँ स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशन में कर रही हैं। लेकिन इतने काम करने के बाद भी आशाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है। क्या सरकार स्वयं महिला श्रम का खुला शोषण नहीं कर रही है?”

उन्होंने कहा कि, “महिला सशक्तिकरण के सिर्फ विज्ञापनों पर ही अरबों रुपये खर्च करने वाली सरकार महिला श्रमिक आशाओं को मासिक वेतन तो छोड़िए मासिक मानदेय तक देने को तैयार नहीं है, जो बेहद शर्मनाक है।”

उत्तराखंड आशा हेल्थ यूनियनवेतन के लिए विरोध प्रदर्शन

Gepostet von Haldwanilive am Freitag, 7. August 2020

जिस मांगों को लेकर आशा वर्कर हड़ताल में बैठी हैं

हड़ताल के माध्यम से आशा वर्करों को सरकारी सेवक का दर्जा और न्यूनतम 21 हजार वेतन

जब तक मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता तब तक आशाओं को भी अन्य स्कीम वर्कर्स की तरह मासिक मानदेय दिया जाए।

देय मासिक राशि और सभी मदों का बकाया सहित अद्यतन भुगतान, आशाओं के विविध भुगतानों में नीचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी पर रोक

कोविड-19 कार्य में लगे सभी आशा वर्करों को पूर्ण सुरक्षा,आशाओं वर्करों को 10 हजार रुपए कोरोना-लॉकडाउन भत्ता।

कोविड-19 कार्य में लगी आशाओं वर्करों की 50 लाख का जीवन बीमा और 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा।

कोरोना ड्यूटी के क्रम में मृत आशा वर्करों के आश्रितों को 50 लाख का बीमा और 4 लाख का अनुग्रह अनुदान भुगतान

सेवानिवृत्त होने पर पेंशन, ड्यूटी के समय दुर्घटना, हार्ट अटैक होने की स्थिति में आशाओं को सुरक्षा और न्यूनतम दस लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान

आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार की मांग आशाओं द्वारा उठाई जा रही है।

उन्होंने जानकारी दी कि 9 अगस्त “भारत छोड़ो आंदोलन दिवस” पर आशा यूनियन द्वारा हड़ताल को जारी रखते हुए अन्य ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर बुद्धपार्क हल्द्वानी में धरना दिया जायेगा।धरने में रिंकी जोशी,शांति शर्मा, हंसी बेलवाल,रेशमा, सरोज रावत, रीना बाला, प्रीति रावत, उमा दरमवाल, चंपा मंडोला, भगवती, दीपा आर्य, गंगा आर्य, माया, माधवी, गीता बोरा,शाइस्ता खान, पुष्पलता,यास्मीन, प्रियंका सक्सेना, शहनाज, मीना सनोला, कमला बोरा,बबीता, हेमा शर्मा आदि बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रहीं।

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