हल्द्वानी: आर्थिक संकट में कोचिंग संचालक,सरकार फैसला ले नहीं तो कोर्ट जाएंगे

हल्द्वानी: आर्थिक संकट में कोचिंग संचालक,सरकार फैसला ले नहीं तो कोर्ट जाएंगे

हल्द्वानी: कोरोना वायरस के चलते लगाए गए लॉकडाउन के दौरान कई सेवाएं बंद हुई थी। अनलॉक प्रक्रियां के शुरू होने के बाद कई सेवाओं को खोला गया लेकिन कुछ अभी भी बंद हैं। शिक्षा की बात करें तो स्कूल ऑनलाइन क्लासेंज करवा रहें लेकिन कोचिंग संस्थान अभी भी बंद हैं। कोचिंग संस्थान के शिक्षकों का कहना है कि शराब की दुकान जिम व होटल खोलने का फैसला ले लिया गया लेकिन हमें समाज से पूर्ण रूप से दरकिनार कर दिया गया है। कोचिंग ही केवल एक सोर्स ऑफ इनकम है और पिछले 10 महीनों से उसका संचालन नहीं हो रहा है।

उत्तराखंड प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन ने कोचिंग सेंटर खोलने की मांग केंद्र और राज्य सरकार से की है। उनका कहना है कि जब होटल, शराब की दुकान, जिम खोलने की स्वीकृति दे दी गई है तो कोचिंग इंस्टीट्यूटों को भी खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि यदि शीघ्र कोचिंग इंस्टीट्यूट को खोलने की इजाजत नहीं मिली तो वे न्यायालय जाएंगे।

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शुक्रवार को मुखानी स्थित ट्रिपल-जे संस्थान में हुई एसोसिएशन की बैठक हुई। जिसमें तमाम बातों को रखा गया। इस दौरान अध्यक्ष वीके जोशी ने कहा कि कोचिंग सेंटरों को बंद हुए छह माह से अधिक का समय बीत गया है। हर क्षेत्र की बात की जा रही है लेकिन हमारा कही पर जिक्र ही नहीं है। संचालक और शिक्षक-कर्मचारी आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। बंद संस्थानों का किराया भी भरना पड़ रहा है। सरकार कोई तो फैसला… स्थिति को देखते हुए हमने सहयोग किया लेकिन अब हालात हमारे लिए नाजुक होते जा रहे हैं।

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उपाध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि अनलॉक की प्रक्रिया में सरकार ने बैंक्वेट हॉल, रेस्टारेंट, शॉपिंग मॉल, धार्मिक स्थल, शराब की दुकानें खोलने तक की इजाजत दे दी, लेकिन कोचिंग इंस्टीट्यूट को खोलने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उपाध्यक्ष केएमएस रावत ने कहा कि अनलॉक में शिक्षा के क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान हीं दिया गया। केवल ऑनलाइन क्लासेज ही छात्र को आगे नहीं बढ़ा सकती है।

इसके अलावा संयोजक सुभाष कांडपाल ने कहा कि यदि जल्द ही कोचिंग सेंटर खोलने की अनुमति नहीं मिलती है तो कोर्ट जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प हम लोगों के पास नहीं है। कोषाध्यक्ष परगट बरार ने कहा कि नए सत्र की तैयारी के लिए संचालकों ने जमा पूंजी खर्च कर दी। उसी दौरान लॉकडाउन शुरू हो गया। अब तो घर का खर्च चलाने तक के पैसे नहीं बचे। इस दौरान पीएम को ज्ञापन भी भेजा गया। इस मौके पर उपसचिव दीक्षित मिश्रा, उपसचिव अमित जोशी, उपसचिव शेखर सती आदि मौजूद रहे।

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