विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस स्पेशल: आत्महत्या को कैसे रोके: डॉक्टर नेहा शर्मा

हल्द्वानी: हर साल 10 अक्टूबर को ”विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस” मनाया जाता है। हम सभी को मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। अगर हम मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं रहेंगे तो हम किसी भी प्रकार का काम  करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर हल्द्वानी मुखानी स्थित मनसा क्लीनीक की डॉक्टर नेहा शर्मा का कहना है कि आज हर उम्र में व्यक्ति कही ना कही मानसिक रूप से अस्वस्थ्य है, पर वह इन कारणों और लक्ष्यण को पहचान नहीं पा रहा है। भागदौड़ भरी जिंदगी, देखादेख की, तनाव, प्रति स्पर्धा व बेरोजागारी व्यक्ति को इस तरह से घेरे हैं कि व्यक्ति इन सब में संतुष्ट ना होने से आत्महत्या जैसे फैसले उठा रहा है। आये दिन हम पढ़ते हैं, देखते हैं कि आजकल 15 से 29 साल के व्यक्ति ज्यादार आत्महत्या जैसा कदम उठाकर जिंदगी को खत्म कर रहे हैं। जब व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ्य नहीं है यानि उसके विचारों में गड़बड़ी ( नकारात्मक विचारों) में घिर कर ही वह आत्महत्या जैसे कदम उठाता है।

डॉ. नेहा शर्मा ने आत्महत्या के कारण और उसका समाधान साझा किया-

तनाव ग्रस्त जीवन

आये दिन आत्महत्या के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं। यह तनाव ग्रस्त होने का एक कारण है। आज आत्महत्या हर उम्र का व्यक्ति बिना सोचे समझे कर रहा है। व्यक्ति की बदलती जीवन शैली, रहन-सहन, बेरोजगारी व देखा देखी भरी जिंदगी के कारण आत्महत्या एक गंभीर रूप ले रही है।

डिप्रेशन

जो व्यक्ति काल्पनिक जीवन में रहेगा वही सच सामने आने पर डिप्रेशन से घिर जाता है। दुख का आना डिप्रेशन नहीं है। डिप्रेशन में व्यक्ति अपने नकारात्मक विचारों के बादलों में घिर जाता है। वह अपने को हताश और असहाय महसूस करता है। इन्ही कारणों के चलते वह आत्महत्या की कोशिश करता है।

सोशल मीडिया का प्रयोग

आज के युवा बच्चे सोशल मीडिया के प्रभाव में आकार मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। इसमें ग्रस्त होकर वो अपने को आत्महत्या तक पहुंचा रहे हैं। ज्यादा सोशल मीडिया का प्रयोग करने से युवा व बच्चे को मूड संबंधित परेशानी यानी चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, किसी काम में मन नहीं लगना, नींद ना आना और कुछ ऑनलाइन गेम्स में आका आत्महत्या जैसा कदम उठाना।

नशा जनिक मानसिक रोग

आज नशा युवा पीढ़ी को नशा इस तरह घेरे हुए है कि वह इसकी चपेट में आकर मासनिक रूप से ग्रस्त हो रहे हैं, यानी अस्वस्थ्य हो रहे हैं। इसके चलते नशा उनकी सोच में परिवर्तन कर रहा है। इस कारण व्यवहारगत समस्याए, पढ़ने में मन ना लगना, अचानक घबराहट होना, बैचेनी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, तोड़फोड़ करना, गुमसुम होना, भूलना, नींद ना आना और डिप्रेशन आदि।

सुझाव

  • आत्महत्या के विचारों से बचने के लिए शारीरिक, मानसिक स्तर पर स्वस्थ्य रहना जरूरी है।

  • समय पर सोना व समय में उठना, नियमित रूप से कसरत, संतुलित पैश्टिक आहार, शराब और नशे से बचे, अपने विचारों व भावनाओ पर नियंत्रित रखें।

  • सकारात्मक सोच से जीये, आत्मविश्वास से काम करें, परिवार के लिए समय निकाले, व्यवहार संबंधित बदलाव को पहचाने, दूसरे की मदद करें, सन्तुष्टि के साथ जीए, वर्तमान में जीये।

  • जीवन की सच्चाई में जीये, खुश रहे, सक्रिय बने, अनुशासित रहे और आत्म नियंत्रण में जीये।