मानसिक तनाव दूर करने में सहायक होगी मनोचिकित्सक डॉक्टर नेहा शर्मा की टिप्स

हल्द्वानीः आज मनोरोग यानी मानसिक तनाव दुनिया में सबसे खतरनाक बीमारी के तौर पर सामने आई है। यह बीमारी दिन प्रतिदिन ना जाने कितने लोगों की जान ले लेती है। आज के दौर में हर पीढ़ी के लोग इस बीमारी से जूझ रहें हैं। लेकिन इस बीमारी का सबसे ज्यादा प्रभाव युवाओं में देखा गया है। पढ़ाई में अव्वल आना, नौकरी करना इन सब के चलते आज का युवा मनोरोग के इस दलदल में फंसता ही चला जा रहा है। इसके बीमारी के वजह से कई बार युवा सारी उम्मीदें छोड़ देतें हैं और अपनी जीवनलीला समाप्त कर देते हैं। या वो मानसिक तनाव के चलते नशे के दलदल में फंस जाते हैं।

मनोरोग से बचने के लिए हल्द्वानी की मनोरोग चिकित्सक नेहा शर्मा बताती हैं कि कई बार मरीज इस बीमारी को सही करने के लिए दवाइयां लेते हैं। लेकिन दवाइयों से भी उनकी यह बीमारी ठीक नही हो पाती। क्योकिं ऐसे मरीज अपने मन में ही विचार बना लेते हैं कि यह बीमारी ठीक नही हो सकती। मानसिक रुप से पीड़ित मरीज अक्सर हर चीज की कल्पना कर लेते हैं।डॉक्टर नेहा शर्मा का कहना है की ऐसे मरीजों को तभी ठीक करा जा सकता है। जब उन्हे काल्पनिक दुनिया से निकाल कर रिएलटी की दुनिया से रुबरू कराया जाए।


डॉक्टर नेहा शर्मा ने बताया कि जल्दी गुस्सा आना, याददाश्त कम होना, चिड़चिड़ापन, उदासी, रिलेशनशिप प्रॉब्लम, फैमिली प्रॉब्मल, कैरियर प्रॉब्लम, काम में मन ना लगना, तालमेल में कमी होना, उदास रहना, डर लगना, एक काम में फोकस नही रहना, आत्मविशवास में कमी, घबराहट होना, नशे का सेवन करने का मन करना यह सब इस बीमारी के मुख्य कारण है।

डॉक्टर नेहा शर्मा ने बताया कि अगर इस बीमारी को जड़ से खत्म करना है तो सबसे पहले मरीज को अपना मनोवैज्ञानिक उपचार करना जरुरी है। इसके बाद ही इस बीमारी से निजात मिल सकता है। डॉक्टर नेहा का कहना है कि आज राज्य में साइकोथैरेपी, सॉइक्लोजिकल काउंसलिंग औऱ सॉइक्लोजिकल टेस्ट होते हैं, जिसको कराने के बाद मरीजो को इस घातक बीमारी से हमेशा के लिए छुटकार मिल सकेगा।

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