धन्य हो शिक्षक…जिस ने बदला देवभूमि के ग्रामीण विद्यालय का नक्शा,कई बच्चों के भविष्य को दिया सहारा

हल्द्वानी: मनुष्य के धरती पर आने का जरिया भले माता पिता होते हैं। लेकिन समाज को शिक्षित और समृद्ध करने का जरिया शिक्षक होते हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में एक ऐसे शिक्षक है जिन्होंने गुरु की परिभाषा को हूबहू ज़मीन पर उतारा है। हम बात कर रहे हैं अल्मोड़ा के कैलाश चन्द्र अधिकारी की।

सन 2000 से टीचिंग शुरू करने वाले 38 वर्षीय कैलाश फिलहाल रा.प्रा. विद्यालय बधाण, ब्लॉक भिक्यासैण, जनपद अल्मोड़ा में प्रमुख अध्यापक होने के साथ यहां के शैक्षिक गतिविधियों को शुरू करने वाले स्तंभ भी हैं। शायद आज कैलाश चन्द्र, उनकी मेहनत, उनका जज्बा और उनका उद्देश्य नहीं होता तो यह ग्रामीण इलाके का छोटा विद्यालय 30 से भी अधिक बच्चों को अच्छे परिवेश में बेहतर शिक्षा नहीं दे रहा होता।

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दरअसल ब्लॉक भिक्यासैण, जनपद अल्मोड़ा का रा.प्रा. विद्यालय बधाण 2007-08 में सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से स्थापित किया गया था। यह विद्यालय बनने के बाद से ही यहां ना तो ढंग की शिक्षा थी, ना माहौल ही पढ़ाई का था और साफ़ सफाई के तो क्या ही कहने। यहां पढ़ाने आने वाले शिक्षक ड्यूटी के कुछ दिन बाद ही भाग जाया करते थे। इन सबका कारण स्कूल परिसर की विवादित ज़मीन और सरकार की अनदेखी भी रही।

विवादित ज़मीन यूं कि एक सामर्थ्यवान व्यक्ति ने अपनी ज़मीन विद्यालय के लिए डोनेट की थी, मगर जब उसे पता चला कि यह पढ़ाई नहीं होती तो उसने अपना काम कराने कि ठानी। मगर सन 2013 में यहां ड्यूटी लगी कैलाश चन्द्र अधिकारी की। इससे पहले उन्होंने कई विद्यालयों के अलावा अपने खुद के स्थापित किए दिव्यज्योति पब्लिक स्कूल में भी बेहतर भूमिका निभाई थी। वो कैलाश चन्द्र ही थे जिनकी वजह से जमीन के मालिक ने ज़मीन छोड़ दी।

इसके बाद कैलाश चन्द्र अधिकारी ने खुद से विद्यालय में साफ़ सफाई करना शुरू किया। कैलाश अधिकारी बताते हैं यहां पहले गाय भैंसों के तबेले और जगह जगह चारपाई आदि पड़े रहती थीं। 15 अगस्त 2013 से ठीक पहले एक योजना बनाई गई जिसके तहत वे बच्चों को जागरूक करने गांव के भ्रमण पर निकले। गांव वासियों को स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर ध्वजारोहण का बुलावा दिया गया। हैरानगी तब हुई जब 15 अगस्त को 50 से भी अधिक लोग और बच्चे विद्यालय पहुंच गए। इसके बाद कैलाश अधिकारी ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

फिर क्या था, इसके बाद कैलाश चन्द्र अधिकारी स्कूल को सुंदर बनाने के लिए मेहनत करनी शुरू की। विद्यालय की साफ़ सफाई, मरम्मत और अनेकों सुविधाओं को मुहैया कराने में या सरकार तक बात पहुंचाने में कैलाश चंद्र का बहुत बड़ा हाथ रहा। इतना ही नहीं उन्होंने यहां पर और लोगों की मदद से ग्राउंड भी बनाया, साथ ही मिड डे मील की शुरुआत भी खुद चूल्हा खड़ा कर उस पर बच्चों के लिए खीर बना कर की।

बहरहाल बाद में विद्यालय को सरकार और निवर्तमान जिलाधिकारी से सपोर्ट मिलने लगा। सरकार की एक स्कीम के माध्यम से विद्यालय में रंग रोगन और मरम्मत समेत कई एक कार्य हुए। आज की तारीख में इस विद्यालय में स्मार्ट टीवी एलईडी, लैपटॉप, सम्पूर्ण फर्नीचर आदि सभी ज़रूरी चीज़ें मौजूद हैं। विद्यालय में पढ़ाई को लेे कर मान्यता भी प्राप्त हो चुकी है।

आज अगर इस विद्यालय का उदय हुआ है तो इसमें कैलाश चन्द्र अधिकारी की बहुत अहम भूमिका है। अब इस विद्यालय में 30 से भी अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। साथ ही यहां कैलाश चन्द्र के अलावा एक दो अध्यापक भी मौजूद हैं। कैलाश चंद्र अधिकारी विद्यालय में अध्यापक होने के साथ साथ यहां के मुख्य व्यक्ति भी हैं। साथ ही वे पिछले कुछ सालों से सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम में भी मास्टर ट्रेनर की तरह योगदान दे रहे हैं। हमारे समाज को वाकई कैलाश चन्द्र अधिकारी जैसे लोगों और शिक्षकों की बहुत ज़रूरत है।

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