हल्द्वानी: मॉनसून का पहला दिन ने उत्तराखण्ड में लोगों को गर्मी से तो राहत दी लेकिन अपने साथ वो तबाही भी लाया। चमोली और अल्मोड़ा से सामने आ रही तस्वीरे रोंगते खड़े करने वाली हैं। दोनों ही इलाकों में बादल फटने से काफी नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है कि इसमेंं एक व्यक्ति की मौत हो गई है वहीं एक लापता है। भारी बारिश के चलते नदियां उफान मे बह रही है, इस कारण से खेतों में मलबा भर गया। मलबा आने से गैरसैंण-चौखुटिया मार्ग पर भी यातायात ठप हो गया है।

फिलहाल मौसम विभाग बादल फटने की बात से इंकार कर रहा है। उसकी मानें तो बादल फटने की घटनाएं मानसून के दौरान होती हैं। अभी प्री-मानसून भी सक्रिय नहीं हुआ है। एक घंटे में साठ मिमी बारिश रिकार्ड की जाए तभी इसे बादल फटना कहा जाएगा, लेकिन इस क्षेत्र में आब्जर्वेटरी भी नहीं है। फिर भी इस मामले की तह तक जाया जाएगा।

अल्मोड़ा और चमोली में फटा बादल

चमोली के गैरसैंण से 35 किलोमीटर किलोमीटर दूर मेहलचौरी कस्बे के पास लामबगड़ गांव है। ग्रामीणों के अनुसार शाम को करीब साढ़े छह बजे एकाएक बादलों की गड़गड़ाहट के साथ तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ ही देर में पास मे बहने वाली बरसाती नदी में उफान पर थी। नदी में आया मलबा खेतों में भर गया। इससे गांव का पैदल रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया।  गांव के 82 वर्षीय बादर सिंह मवेशियों को चुगाने जंगल गए थे। अंधेरा होने पर भी जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता हुई। ग्रामीण उनकी तलाश में निकले तो उनका शव बरसाती नदी के किनारे मिला। आशंका है वह भी उफान की चपेट में आ गए। चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि राहत व बचाव टीम मौके के लिए रवाना कर दी गई है।

वहीं हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों (उच्च हिमालय में घास के मैदान ) की तरफ बकरी चुगाने ले गए ग्रामीण आकाशीय बिजली गिरने से दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश से बचने के लिए वे एक पेड़ के नीचे खड़े थे कि तभी बिजली गिरी। इसमें करीब 100 बकरियों की मौत हो गई। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके पास 600 भेड़-बकरियां हैं। आकाशीय बिजली गिरने से उनकी 90 बकरियां मर गईं हैं।

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