आरोपी तो मारा गया लेकिन उसे बचाने वाले बच गए, क्या ऐसे होगा फैसला !

शुक्रवार सुबह सबसे बड़ी खबर उत्तर प्रदेश से सामने आई कि 24 घंटे पहले उज्जैन से पकड़ा जाने वाला गैंगस्टर विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। पुलिस ने पिछले 24 घंटे में उससे क्या पूछताछ की ये किसी को नहीं पता है। विकास दुबे कानपुर के बिकरु गांव में दो जुलाई की रात को आठ पुलिसकर्मियों की हत्याकर फरार चल रहा था।

उत्तर प्रदेश से वह मध्यप्रदेश कैसे पहुंचा ये भी सबसे बड़ा सवाल था। बिना पहुंच के इतने बड़ा कांड कर दूसरे राज्य जाना बिल्कुल भी आसान नहीं है। उसके बाद कल से आरोपी को जो वीडिया सामने आ रहे थे उसमें आरोपी ने खुद सरेंडर किया था। कहा जा रहा था कि अपने साथियों के मारे जाने के बाद उसने अपने आप को पुलिस के हवाले किया।आज सुबह उसे मध्यप्रदेश से कानपुर वापस लाया जा रहा था। एसटीएफ गाड़ी उसे कानपुर ला रही ला रही थी। इस दौरान गाड़ी पलट गई। उसने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। जिसके बाद पुलिस ने उसे मुठभेड़ में मार गिराया है।

अब सवाल ये उठता है कि माना कि इस मामले में देश की जनता की भावनाएं जुड़ी थी और हर कोई चाहता था कि आरोपी को सख्त सजा मिले लेकिन क्या विकास दुबे बिना किसी सपोर्ट के गैंगस्टर बना। सिस्टम के कौन गद्दार थे जो उसे पल-पल खी खबरे दे रहे थे क्या वह गुनहगार नहीं हैं। सवाल तो काफी है लेकिन जवाब आरोपी विकास दुबे के साथ ही चल दिए हैं। राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार और पुलिस को घेरना तो शुरू कर दिया है लेकिन खुलकर इसलिए भी नहीं बोल रहे है ताकि जनता को सामने भी उसे अपनी छवि साफ रखनी है।

कुछ सवाल जो बताते हैं कि ये पूरा कांड फिक्स था !

पुलिस का काफिला तो आरोपी को लेकर आ रहा था उसका पीछा मीडिया के कर्मी भी कर रहे थे । उन्हें बीच में रोक दिया गया और फिर खबर आई कि जिस गाड़ी में विकास बैठा था उसका एक्सीडेंट हुआ है। आरोपी ने भागने की कोशिश की और इसी बीच वो मारा गया। नकाउंटर के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस के आला अफसरों ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि क्या मीडिया को रोकने के लिए ही अचानक चेकिंग शुरू की गई थी? 

विकास को जब झांसी में एमपी पुलिस ने यूपी पुलिस के हवाले किया, तब वहां 10 से ज्यादा गाड़ियां तैयार थीं। इसमें से एक गाड़ी में विकास को बैठाया गया। बाकी गाड़ियां आगे-पीछे थीं। लेकिन एक्सीडेंट उसी गाड़ी का हुआ जिसमें विकास को बैठाया गया था।

विकास के खिलाफ 5 दर्ज से ज्यादा मामले दर्ज थे। 8 पुलिस कर्मियों को उसने मौत के घाट उतारा था। क्या पुलिस ने उसे हथकड़ी पहनाई थी ! ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पुलिस कह रही है कि हादसे के बाद उसने पुलिसकर्मियों की बंदूक छिनी, क्या हथकड़ी पहना व्यक्ति ऐसा कर सकता है !

इस बारे में पूछे जाने पर यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने बताया था कि विकास से पूछताछ की जाए तो बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे। इसमें आईएएस, आईपीएस, नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं।

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