नई दिल्ली :  राहुल गांधी शनिवार से कांग्रेस पार्टी की कमान संभालने जा रहे हैं। पार्टी के सिकुड़ते जनाधार के बीच अध्यक्ष के तौर पर उनके सामने ढेरों चुनौतियां खड़ी हैं। राहुल को न सिर्फ संगठन को मजबूत बनाना है, बल्कि चुनावी राजनीति में भी लगातार मिल रही नाकामियों के सिलसिले को भी तोड़ना होगा । आइए जानते हैं पांच बड़ी चुनौतियों के बारे में जिनसे राहुल को पार पाना होगा

राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती है पार्टी संगठन में नई जान फूंकना। कभी लगभग पूरे देश पर राज करने वाली पार्टी आज सिर्फ 5 राज्यों तक सिमट कर रह गई है। कई बड़े राज्य ऐसे हैं जहां पार्टी को सत्ता से दूर हुए एक-दो दशक से ज्यादा का वक्त हो चुका है। लगातार मिल रही चुनावी हार से पार्टी कार्यकर्ता हताश हैं।

अध्यक्ष के तौर पर राहुल का मुकाबला सीधे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगा जो अपनी आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं। दूसरी तरफ राहुल नरम छवि के माने जाते हैं।  उनके भाषण देने के अंदाज में आक्रामकता नजर नहीं आती जो आज के यूथ को काफी अपील करती है।

एक वक्त में राज्यों में मजबूत रही कांग्रेस इसलिए कमजोर पड़ती गई कि स्थानीय नेतृत्व को तरजीह देने के बजाय चीजें 10 जनपथ से तय होने लगीं हैं । कई ऐसे राज्य हैं जहां कांग्रेस ने क्षेत्रीय क्षत्रपों की अनदेखी की जिसकी कीमत पार्टी को  राज्सय में सत्ता गंवा कर चुकानी पड़ी।

गुटबाजी कमोबेश हर पार्टी में होती है पर कांग्रेस इस मामले में अलग ही नजर आती है । कांग्रेस में कई राज्यों में गुटबाजी है और पार्टी नेता एक दूसरे की जड़ें काटने में जुटे हैं।  इस गुटबाजी से निपटना राहुल के लिए एक बड़ी चुनौती है।

पार्टी की छवि पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार और वंशवाद में घिरी पार्टी की हो गई है । राहुल के लिए पार्टी की इस छवि को तोड़ना बड़ी चुनौती है।