उत्तराखण्ड के इस सरकारी स्कूल के बच्चों का अनोखा टैलेंट, निकालते हैं खुद का अखबार

अल्मोड़ा: राज्य शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, ये हम नहीं कह रहे है बल्कि पहाड़ी इलाकों में सरकारी स्कूलों के छात्रों की चीजों को जानने की इच्छुकता बता रही है। अल्मोड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला के अध्यापक भास्कर जोशी अपने स्कूल के छात्र-छात्रों को आधुनिक चीजों के अवगत कराते रहते हैं।

कभी बच्चे संस्कृत बोलते हैं तो कभी बच्चे अंग्रेजी में शो करते नजर आते हैं। इसी दिशा में स्कूल के बच्चों ने मासिक समाचार पत्र बजेला जागरण प्रकाशत किया। इस पत्र मे बच्चे न केवल विज्ञापन लिखें ,साथ ही साथ विद्यालय के बारे मे, गाँव के बारे मे, अपने देश के बारे मे,विदेश के बारे मे तथा अपने आस पास घटित हो रही घटनाओं के बारे में लिखा।

अखबार में प्रकाशित कुछ अंश इस प्रकार से है
#बैलों की लड़ाई – संजय
#बच्चो ने की शरारत – राहुल
#गणेश दा का घोड़ा मर गया -संजय
#नैलपड मे आमा गुजर गई- नेहा
#आज कल नशेड़ी नही दिखाई देते – तनुजा

भास्कर जोशी ने बताया कि व्यवस्था से एकल अध्यापक विद्यालय में भाषा हेतु बहुत अच्छा परिणाम मिल रहा है। गतिविधि आधारित शैक्षिक वातावरण के लिए यह क्रियाकलाप बहुत आनंदमयी और सहज है छात्रों में सृजनात्मक क्षमता को विकसित करने, उनमें अभिव्यक्ति की क्षमता का विस्तार करने, कला, संस्कृति व साहित्य के प्रति अभिरूचि उत्पन्न करने, देश-दुनिया-राज्य-समाज की स्थितियों से साक्षात्कार कराने के लिये बाल अख़बार की उपादेयता निश्चित तौर पर अतुलनीय है।

इस नवाचार के माध्यम से छात्रों का पठन कौशल एवं लेखन कौशल भी विकसित होता है। उनमें नेतृत्व क्षमता जागृत होती है और साथ ही जो छात्र पढ़ने, लिखने या बोलने में कमजोर हैं, उनमें आत्मविश्वास उत्पन्न होता है। बाल अखबार जहां विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि को दर्ज कर सकता है, साथ ही साथ यह एक ऐसा नवाचार है जिसमें छात्र-छात्राओं को अपनी शैली विकसित करने का अवसर मिलेगा और उनकी अभिव्यक्ति मुखर होगी।भास्कर जोशी ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों की नॉलेज बढ़ती है। उन्हें शब्दों का ज्ञान होता है। उन्होंने बताया कि इस अखबार को स्कूल परिसर में रखा जाता है और अभिभावक व ग्रामीण इसे पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं। वही हर माह होने वाली अभिभावक मीटिंग में यह अखबार चर्चा का विषय रहता है।