रोडवेज़ की लापरवाही के चलते बस चालक की मौत,तीन दिन तक लगातार चला रहा था गाड़ी

हल्द्वानी: प्रदेश के रोडवेज अफसरों की लापरवाही के चलते रोडवेज के बुज़ुर्ग चालक की जान चली गई। रविवार को हरिद्वार में दुर्घटनाग्रस्त हुई बस के चालक की मंगलवार को ऋषिकेश एम्स में मौत हो गई। ऐसे में कई अफसरों पर जांच के बाद गाज गिर सकती है। जिसके वजह से सब डरे हुए भी हैं। गाज गिरनी इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि कुछ अफसर तो मोटर वाहन एक्ट की धज्जियां उड़ाने में लगे हुए हैं।

दरअसल जानकारी के अनुसार मृत चालक ओमपाल सिंह को रोडवेज के अफसरों ने लगातार 2000 किमी से भी ज़्यादा की ड्यूटी करवाई थी। जिसके बाद चंडीगढ़ से हरिद्वार होकर कोटद्वार जा रही रोडवेज बस रविवार सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हरिद्वार डिपो की बस श्यामपुर में सामने से आ रही उत्तर प्रदेश की रोडवेज बस से जा भिड़ी। इसी बस के 55 वर्षीय चालक ओमपाल सिंह काफी ज़ख्मी हो गए थे। वहां से उन्हें ऋषिकेश एम्स अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। माना यह जा रहा है कि गाड़ी का एक्सीडेंट, चालक को नींद की झपकी आने की वजह से हुआ।

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पहले आपको यह बता देते हैं कि मोटर वाहन नियमों के अनुसार कोई भी चालक ज़्यादा से ज़्यादा केवल आठ घंटे बस का संचालन कर सकता है। इतने में भी बीच में एक घंटे का आराम ज़रूरी है। इसके बाद चालक को दूसरी ड्यूटी से पहले कम से कम नौ घंटे आराम करना अनिवार्य है। मगर रोडवेज के अफसर खुद के बनाए नियमों पर चलते हैं। ओमपाल सिंह के केस में भी यही हुआ।

मृत चालक ओमपाल सिंह सात जनवरी शाम को अपनी नॉर्मल ड्यूटी पर थे। यानी वे हरिद्वार से रुपड़िया गाड़ी को लेकर आए। आपको बता दें कि एक तरफ से यह रास्ता 600 किमी लंबा है। यानी जब वे अगली सुबह हरिद्वार पहुंचे तो उन्होंने 1200 किमी का सफर तय कर लिया था। नियमों के मुताबिक अब उनके आराम का वक्त था। मगर उन्हें आते ही हरिद्वार-चंडीगढ़-हरिद्वार-कोटद्वार मार्ग बस सेवा पर करीब 800 किमी फिर से बस संचालन पर भेज दिया गया। लगातार तीन रात से बस चला रहे चालक ओमपाल सिंह काफी थके हुए थे।

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अब एक्सीडेंट के बाद एम्स ऋषिकेश में इलाज के दौरान 55 साल के ओमपाल की मृत्यु रोडवेज अफसरों के लिए मुसीबत बन गई है। इधर अफसर अपने बचाव में जुटे हैं। उधर, कर्मचारी यूनियन ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच की मांग करते हुए लगातार ड्यूटी कराने वाले अफसरों पर एफआइआर दर्ज कराने की मांग भी की। साथ ही मृत चालक की पत्नी ने 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता व बेटे को नौकरी देने की मांग की है।

प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने महाप्रबंधक प्रशासन हरगिरी और महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन को तलब कर मामले की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए हैं।

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