मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानी से निजात दिलाएगी साहस होम्योपैथिक वीडियो टिप्स

मनुष्य के शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए समय समय पर कभी दुआ तो कभी दवा की जरूरत तो पड़ती ही है। परन्तु आज की स्थिती देखें तो दवाओं का सेवन शरीर को जीवित रखने के लिए मानों जरूरी ही हो चला है। पर इस विषय पर लगातार किए गये  शोध के अनुसार अधिक दवाइयों का प्रयोग भी इंसान के  शरीर को और बीमार कर रहा है।केमिकल युक्त दवाओं के दुष्प्रभाव से बचने के लिए होम्‍योपैथी चिकित्‍सा हमैशा से ही एलोपैथिक चिकित्सा के सम्मुख एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा गया है।

होम्यो पैथिक दवाओं का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने पर जोर देने वाले डॉक्टर नवीन चन्द्र पांडे के अनुसार होमयोपैथिक दवाओं को अधिक सुरक्षित बताते हैं। वे अकसर अपने यू-ट्यूब चैनल एंव अन्य सोशल मीडीया साइट्स के माध्यम से विभिन्न बीमारियों के लिए बेहतर कंपनी की  होम्योपैथिक दवाओं का सुझाव देते हैं। बीते बुधवार को उन्होंने महिलाओं की मासिक समस्याओं जैसे मासिक धर्म में अनियमतता ,अधिक रक्तस्राव , मासिक धर्म के चलते पेट में ऐंठन, आदि कईं समस्याओं से निजात पाने के लिए एस बी एल यानी शा

महिलाओं में माहवारी या पीरियड संबंधी अनियमितता एक आम समस्या है. कई बार माहवारी नहीं आने या बंद होने के कुछ और भी कारण होते हैं, महिलाओं में स्ट्रेस बढ़ाता है माहवारी के दौरान महिलाओं में डिप्रेशन, पेट दर्द होना सामान्य है.  माहवारी सहसा बंद होने पर भी महिलाओं को अब घबराने की जरूरत नहीं है। यह शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। एक ऐसा चक्र है, जो नियमित समय पर चलता रहता है। जिस तरीके से शरीर के अन्य क्रिया जरूरी होते हैं। उसी प्रकार स्त्री के शरीर में मासिक धर्म का आना उनके शरीर का एक प्रक्रिया है।  परन्तु यह प्रक्रिया हमेशा सुखद नहीं होती, कई बार मासिक धर्म की अनिमियता के कारण यह बहुत कष्टदायक हो जाती है। । जिससे यह बहुत कष्टकारी हो जाता है।

895होम्योपैथी, एक चिकित्सा पद्धति है। होम्‍योपैथी चिकित्‍सा विज्ञान के जन्‍मदाता डॉ॰ क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैम्यूल हानेमान है। यह चिकित्सा के ‘समरूपता के सिंद्धात’ पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियाँ उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है। जिन्हें रोग के लक्षणों के समान किंतु उनसे प्रबल होना चाहिए। अत: रोग अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से, अविलंब और सदा के लिए नष्ट और समाप्त उसी औषधि से हो सकता है जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सकें।