पति करता था अत्याचार, महिला खिलाड़ी ने नहीं मानी हार, देश के लिए जीता पदक

नई दिल्ली: देश के लिए खेलना बिल्कुल भी आसान नहीं रहता है.. भले ही वो पुरुष हो या महिला… भारत में खेलों को लेकर जनता उत्साहित तो काफी रहती है लेकिन अपने घर से किसी को उस संर्घष की राह पर भेजने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। महिलाओं के लिए हालात ज्यादा खराब हैं पहले घर और फिर ससुराल… कई बार देखने को मिला है कि देश के लिए खेलने के लिए किसी ने घर छोड़ा है तो किसी ने रिश्ता तोड़ा है। अपने देश की जर्सी पहनने के लिए घरवालों की प्रताड़ना का भी सामना किया है। आज हम ऐसी ही खिलाड़ी की कहानी आपके बीच लेकर आए हैं।

भारतीय महिला पहलवान गुरशरणप्रीत कौर जिन्होंने पति की पिटाई से ज्यादा अपने सपनों तो महत्व दिया और देश के लिए पदक जीतकर उस तरह की सोच रखने वाले लोगों को शर्मिंदा कर दिया।

गुरशरण प्रीत कौर ने 37 साल की उम्र में कुश्ती में 8 साल के बाद वापसी की और एक पदक अपने नाम किया। एशियन कुश्ती चैंपियनशिप 2020 में 72 किलोग्राम भार वर्ग में गुरशरण ने कांस्य पदक जीता।उन्होंने बताया कि जब वे लड़कों के साथ अभ्यास करती थीं तो उनके पति उनको पीटा करते थे। पंजाब के तरनतारन की रहने वालीं गुरशरण ने बताया कि 2013 में उनकी शादी हो गई थी। पति उनके खेलने के खिलाफ थे। लड़कों के साथ कुश्ती नहीं करने देते थे। जब वो लड़कों के साथ अभ्यास करती थीं तो पतिन उन्हें बहुत पीटते थे। इसके बाद उन्होंने अलग होने का फैसला किया। गुरशरण की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए. एक वक्त लगा कि रेसलिंग में वापसी काफी मुश्किल है लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

करीब 8 साल बाद रेसलिंग रिंग में वापस लौटीं गुरुशरण ने 2018 से फिर से अभ्यास करना शुरू किया। इस दौरान उनकी 4 साल की बेटी की देखभाल उनकी मां ने की। गुरुशरण ने कहा कि उन्होंने जो पदक जीता है वो अपनी मां की मदद से जीता है। उन्होंने उनका हमेशा से साथ दिया है। उन्हें किसी भी चीज की जरूरत होती है तो उनकी मम्मी ही पूरा करती हैं। गुरशणप्रीत कौर का कहना है कि जब पति उन्हें मारता-पीटता था तो मां उनका सहारा होती थीं।

गुरुशरण कहती है कि शादी के बाद किसी भी क्षेत्र में महिला को उसके पति का सहारा मिले तो वो आसमान की बुलंदी भी छू सकता है लेकिन उसके साथ ऐसा नही हुआ। आठ साल के बाद कुश्ती में वापसी के बाद अब गुरुशरण का लक्ष्य ओलंपिक के लिए आगामी बुधवार को लखनऊ में होने वाले ट्रायल को जीतना है जिसके लिए वो जी तोड़ मेहनत कर रही हैं। कुश्ती की दुनिया में भले ही गुरुशरण की कामयाबी बहुत बड़ी ना हो लेकिन जिन परिस्थितियों में गुरुशरण ने ये कामयाबी हासिल की है वो समाज और महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है।

न्यूज सोर्स- जी न्यूज