अकेली शैफाली खिताब नहीं दिला सकती थी, भारत हकदार भी नहीं था !

हल्द्वानी:पंकज पांडे: भारतीय टीम को वर्ल्ड टी-20 फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 85 रनों से मात दी। यह ऑस्ट्रेलिया का पांचवा खिताब है। भारत की हार से हर कोई निराश है। भारत को अपनी बेटियों पर गर्व है। खेल के मैदान पर उन्होंने देस का नाम रोशन किया है। साल 2017 में आयोजित हुए विश्वकप में भारत ने फाइनल तक का सफर तय किया था। भारत के लिए शैफाली वर्मा शानदार फॉर्म में रही। उन्होंने हर मुकाबले में भारत को अच्छी शुरुआत दी थी लेकिन फाइनल में 184 रनों का पीछा करते हुए वह पहले ओवर में ही आउट हो गई। यह किसी के साथ भी हो सकता है। इस मैच में भारतीय टीम ने कैच भी टपकाए जो हार का मुख्य कारण भी बनें।

ऐसे तो कप नहीं जीता जाएगा

टीम इंडिया भले ही फाइनल तक पहुंची हो लेकिन उन्हें किस्मत का साथ भी मिला। मैं बल्लेबाजी की बात कर रहा हूं। पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ शैफाली के बैट से रन निकले। टीम की मजबूत कड़ी स्मृधि मंदाना और हरमनप्रीत कौर पूरे तरीके से फ्लॉप रहे। कोई भी बड़ा टूर्नामेंट जीतने के लिए बड़े खिलाड़ियों को रन बनाने होते हैं। मैनें बतौर फैन जितने भी बड़े फाइनल देखे हां वहां पर बड़े खिलाड़ियों ने स्कोर किया है। साल 2003 विश्वकप फाइनल रिंकी पोंटिंग, साल 2007 एडम गिलक्रिस्ट और 2011 धोनी।

आप केवल 2-3 खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर इतना बड़ा खिताब नहीं जीत सकते हैं। पांच पारियों में शैफाली और दीप्ति ही 100 का आंकड़ा पार करने में कामयाब रहे थे। किसी भी मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने बड़ा स्कोर नहीं बनाया था, वो तो गेंदबाजों ने टीम की नैया हर मैच में पार लगाई। फाइनल में गेंदबाजों का दिन नहीं था तो बल्लेबाजों पर जिम्मेदारी थी लेकिन वह नाकाम रहे। इस हार से टीम को सिखना होगा। वो टीम बड़े मुकाबले जीतती है जो नाजुक स्थिति ने निकलना जानती हो। वर्ल्ड टी-20 में भाग लेने वाली भारतीय टीम की औसत आयु 23 साल थी और जो प्रदर्शन उन्होंने किया उसने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा किया। अनुभव के साथ भारतीय टीम यह सीख जाएगी।

बोर्ड को देना होगा ध्यान

महिला क्रिकेट को कम पैसे देने का आरोप बीसीसीआई पर लगता रहा है। लेकिन इसके पीछे क्रिकेट फैंस ही जिम्मेदार हैं, जो केवल बड़े स्तर के टूर्नामेंट में टीम को सपोर्ट करते हैं। बोर्ड सैलेरी और अनुबंध मुकाबलों और मैदानों से आए धन से ही करता है। बोर्ड को कोशिश करनी होगी जिससे की लोगों की रुचि महिला क्रिकेट के लिए बड़े। छोटे शहरों में मैच का आयोजन कराया जा सकता सकता है। कई टूरिस्ट जगहों पर महिला टीम खेल सकती है, जिससे लोगों को महिला क्रिकेट की जानकारी मिलेगी। हम दो बार फाइनल जीतने के करीब पहुंचे हैं और अगर ये नतीजे हमारे पक्ष में होते तो शायद भारतीय क्रिकेट बदल भी जाता। खिलाड़ियों ने कई मौको पर देश और फैंस का सिर ऊंचा किया है।

‘Team India were eyeing their maiden Women’s T20 World Cup title (AP Photo)

अब हमारी बारी है कि हम अपनी टीम का सिर ग्राउंड पर सपोर्ट कर ऊंचा करें। पुरुष क्रिकेट साल 1983 विश्वकप जीत के बाद ही बदला है। उसी तरह से महिला क्रिकेट को भी राह दिखानी होगी। हमनप्रीत कौर को देश का सबसे बड़ा खिलाड़ी कहा जाता है लेकिन उन्होंने केवल 2 टेस्ट मैच खेले हैं। मंदाना के खाते में भी इतने ही टेस्ट मैच है। इस तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है। जिस तरह ही पुरुषों का शेड्यूल व्यस्त रखा जाता है, उसी तरह से महिला क्रिकेट को भी रखना होगा। भले ही आप राज्य स्तर पर टूर्नामेंट का आयोजन करें। यह चीजे केवल क्रिकेट को ही नहीं हमारे देश के हर खेल को आगे ले जाएगी। पूरा देश चाहता है कि हर खिलाड़ी आर्थिक रूप से विराट कोहली जैसा हो और खेल क्रिकेट जैसा हो।