फिर किया क्रिकेट को गंदा, पाकिस्तान के खिलाड़ी ने कबूली फिक्सिंग

नई दिल्लीछ फिक्सिंग क्रिकेट के लिए एक कलंक है। इस खेल को गंदा करने वालों को कड़ी दी जाए इस पूरा क्रिकेट जगत साथ रहता है। फिक्सिंग में पाकिस्तान खिलाड़ियों का नाम आना एक आम बात सी हो गई है। कई खिलाड़ी इस वजह से सजा भी काट चुके लेकिन फिर भी इस देश के खिलाड़ी पैसों के वजह से क्रिकेट को बेच रहे हैं। पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज ने एक टी-20 में फिक्सिंग की साजिश में शामिल होने की बात मान ली है।

मामला पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) से जुड़ा है। पूर्व ओपनर नासिर जमशेद ने पहले फिक्सिंग के तमाम आरोपों से इनकार किया था। लेकिन इंग्लैंड के मैनचेस्टर में सोमवार को सुनवाई के दौरान अपनी याचिका बदल दी। फिक्सर यूसुफ अनवर (36) और मोहम्मद एजाज (34) रिश्वत देने की बात पहले ही मान चुके थे। इस मामले में फरवरी में सजा सुनाई जाएगी।

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मामले की सुनवाई के शुरुआत में सरकारी वकील एंड्रयू थॉमस ने कहा, ‘‘एक अंडरकवर पुलिस अधिकारी ने खुद को फिक्सिंग गिरोह का हिस्सा बनाया। साल 2016 में बांग्‍लादेश प्रीमियर लीग में फिक्सिंग के प्रयास और फरवरी 2017 में पाकिस्‍तान सुपर लीग में फिक्सिंग का खुलासा उन्होंने किया। दोनों मामलों में एक ओपनर ने पैसे लेकर एक ओवर की पहली दो गेंद पर रन नहीं बनाने की सहमति दी थी।’’ इस केस में पूर्व ओपनर नासिर जमशेद का नाम सामने आ रहा था।  उन्होंने पाकिस्तान सुपर लीग में इस्लामाबाद युनाइटेड और पेशावर जाल्मी के बीच दुबई में नौ फरवरी को खेले गए मैच में अन्य खिलाडि़यों को स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने के लिए उकसाया था। बाद में इस मामले के सामने आने के बाद इस पर जांच की गई और ये सही पाया गया कि नासिर इसमें शामिल थे।  जमशेद ने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में पाकिस्तान के लिए कुल 68 मैच खेले हैं।

इससे पहले अगस्त 2018 में भ्रष्टाचार रोधी एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल ने जमशेद को 10 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। नासिर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की भ्रष्टाचार विरोधी संहिता की सात धाराओं के उल्लंघन का आरोप था। इसमें से ट्रिब्यूनल ने नासिर को पांच में दोषी पाया था। उन्होंने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया था। 2017 की शुरुआत में क्रिकेट में भ्रष्टाचार की जांच शुरू करने के बाद से ही जमशेद पीसीबी के रडार पर थे। उन्हें फरवरी, 2017 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था। दिसंबर, 2017 में पीसीबी ने जमशेद पर एक साल का प्रतिबंध लगाया था, भ्रष्टाचार रोधी ट्रिब्यूनल ने उनको पीएसएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में जांच में सहयोग नहीं देने का दोषी पाया था। जमशेद पर लगा यह प्रतिबंध अप्रैल 2018 में ही हटा था।