दादा को मिली BCCI की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी,संभाली अध्यक्ष की कुर्सी

नई दिल्ली: बीसीसीआई को नया अध्यक्ष मिल गया है। भारत के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली बोर्ड के नए अध्यक्ष बन गए हैं। वो बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष बनें। बुधवार को बोर्ड के मुंबई स्थित बोर्ड हेडक्वार्टर में जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान आधिकारिक तौर पर गांगुली की नियुक्ति की घोषणा कर दी गई। गांगुली निर्विरोध चुने गए हैं। वे जुलाई 2020 तक इस बोर्ड को सेवा देवा दे पाएंगे।बीसीसीआई ने अपने ट्विटर पेज पर लिखा, ‘यह आधिकारिक है, ‘सौरव गांगुली को औपचारिक रूप से बीसीसीआई का अध्यक्ष चुना गया।’

गांगुली को उस वक्त बीसीसीआई की कमान मिली जब वो नकारात्मक चीजों के चलते खबरों में रहा है। खासकर पिछले 6 साल से। मैच फिक्सिंग से लेकर भ्रष्टाचार तक क्रिकेट से जुड़े अधिकारियों के नाम सामने आए। गांगुली ने टीम इंडिया को भी फिक्सिंग दौर से उभारा था और मजबूक बनाया था। दादा द्वारा डाली गई टीम इंडिया की वो नींव आज क्रिकेट में दबदबा बनाए हुए है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सीओए का कार्यकाल भी खत्म हो जाएगा। पिछले कुछ सालों में सीओए का बीसीसीआई में काफी दखल रहा है। सीओए का कार्यकाल 33 महीनों का रहा। गांगुली के बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद सीओए के पूर्व प्रमुख विनोद राय ने कहा कि मैं संतुष्ट हूं।

बुधवार को 47 साल के सौरव गांगुली ने BCCI की कमान संभालते ही 65 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सौरव गांगुली 65 साल बाद ऐसे पहले टेस्ट क्रिकेटर हैं, जो बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए। इससे पहले टेस्ट क्रिकेटर के तौर पर ‘विज्जी’ के नाम से मशहूर महाराजा कुमार विजयनगरम बीसीसीआई का अध्यक्ष बने थे, जो 1954 से 1956 तक इस पद पर रहे।

Source- Twitter Bcci

गांगुली पहले ही कह चुके हैं कि अध्यक्ष बनने के बाद उनका लक्ष्य घरेलू क्रिकेट में सुधार करना होगा। बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए गांगुली का नामांकन सर्वसम्मति से हुआ है, जबकि गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह सचिव और उत्तराखंड के महीम वर्मा नए उपाध्यक्ष हैं। कार्यभार संभालने के बाद सौरव गांगुली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इस दौरान उनसे महेंद्र सिंह धोनी के रिटायरमेंट और टीम में रोल पर सवाल किए गए। ‘दादा’ ने इसपर सटीक जवाब दिया और कहा कि धोनी भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी हैं और जबतक मैं हूं तो हर प्लेयर का सम्मान किया जाएगा। सौरव गांगुली ने कहा कि जो चैम्पियन होते हैं, वह जल्द खत्म नहीं होते हैं।

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