दादा होंगे BCCI के बॉस, उत्तराखण्ड के महिम वर्मा उपाध्यक्ष

हल्द्वानी: भारतीय क्रिकेट में दादा यानी सौरभ गांगुली की वापसी होने वाली है। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के नए अध्यक्ष बनेंगे। इसके अलावा क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखण्ड के सचिव महिम वर्मा उपाध्यक्ष होंगे। वहीं गुजरात क्रिकेट संघ के पूर्व संयुक्त सचिव व गृहमंत्री अमित शाह के पुत्र जय शाह बोर्ड के नए सचिव होंगे। इसके अलावा अरुण ठाकुर का कोषाध्यक्ष और जयेश जॉर्ज का संयुक्त सचिव बनना तय है। यह सभी घोषणा सोमवार देर शाम तक हो जाएगी।

वहीं कर्नाटक क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि बृजेश पटेल को आइपीएल के नया चेयरमैन बनाया जाएगा। बता दें कि मुंबई में रविवार शाम को हुई राज्य क्रिकेट संघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस बैठक के बाद तय हो गया कि इस बार बीसीसीआइ में कोई चुनाव नहीं होगा और सभी पदों पर निर्विरोध चयन होगा।

मुंबई में बीसीसीआइ मुख्यालय में राज्य संघों के पदाधिकारियों की बैठक में बोर्ड के नई टीम के सदस्यों के नामों पर चर्चा हुई जो रात 11 बजे तक चली। इस बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और पूर्व बीसीसीआइ अध्यक्ष अनुराग ठाकुर, पूर्व आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला, पूर्व आइसीसी चेयरमैन एन श्रीनिवासन मौजूद रहे। श्रीनिवासन गुट ब्रजेश पटेल को बीसीसीआइ अध्यक्ष और गांगुली को आइपीएल चेयरमैन बनाना चाहता था लेकिन गांगुली आइपीएल चेयरमैन बनने के लिए हामी नहीं भरी। बताया जा रहा है कि गांगुली ने कहा कि अगर वो आईपीएल के चेयरमैन बनते हैं तो 22 कंपनियों के साथ चल रहे करार को नहीं तोडेंगे। वह इन सभी करार को तभी छोड़ेंगे अगर उन्हें बीसीसीआइ अध्यक्ष पद दिया जाए। इसके बाद सभी ने गांगुली की बात मान ली। हालांकि अध्यक्ष और आइपीएल चेयरमैन पद के अलावा सभी पदों के लिए नामों की सोमवार को होने वाले नामांकन से पहले अधिकारिक घोषणा की जाएगी।

अगर नजर लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर डाले तो गांगुली और शाह आठ से 10 महीने तक ही पदों पर रह पाएंगे। क्योंकि इसके बाद दोनों का कूलिंग ऑफ पीरियड शुरू हो जाएगा। ये दोनों पहले ही पांच साल से ज्यादा अपने अपने राज्य क्रिकेट संघों में पद पर रह चुके हैं। आने वाले इन 10 महीनों में ऐसा कुछ बड़ा बदलाव नहीं होता है तो इन लोगों को हटना पड़ेगा। अगर इस दौरान केंद्र सरकार खेल बिल लाती है और बीसीसीआइ को उसमें शामिल करती है तो फिर स्थितियां कुछ और हो सकती है।