नई दिल्ली: जिंदगी का दूसरा नाम परीक्षा है। हर नया दिन एक नई परीक्षा सामने खड़ा करता है, जो इस परीक्षा में पास होता है वो ही जिंदगी में असल हीरो कहलाता है। कई बार जिंदगी कुछ ऐसे घाव दे देती है, जिसके बाद इंसान की इच्छा शक्ति खत्म हो जाती है लेकिन आज हम आपकों एक ऐसी बेटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने जिंदगी के सबसे बड़े हादसे को अपना सबसे बड़ा दोस्त बना लिया और वो मिसाल पेश कर रही है।

थाईलैंड पैरा बैडमिंटन इंटरनेश्नल चैंपियनशिप 2018 में  भारत की मानसी जोशी ने कांस्य पदक जीता। 29 साल की मानशी ने साल 2011 में एक सड़क हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था जिसके बाद भी उसने अपने खिलाड़ी बनने के सपने को मरने नहीं दिया। अब उनका लक्ष्य इंडोनेशिया में होने वाले पैरा एशियाई खेलों में पदक जीतना है। मानसी का जन्म मुंबई में हुआ। मौजूदा वक्त में वह पी गोपीचंद अकादमी में प्रशिक्षण ले रही है। वह जकार्ता में अक्तूबर में होने वाले पैरा एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन कने के प्रति आश्वस्त हैं। मानसी नेपीटीआई से कहा, ‘मैं बचपन से बैडमिंटन खेल रही हूं और विकलांग होने के बाद भी मैंने फिर से यह खेल खेलना शुरू कर दिया।’

Inspiration: Para-badminton player Manasi is defying the odds

मानसी कृत्रिम पांव के सहारे खेलती है तथा अब तक कई बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा ले चुकी। वह 2015 से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है और पदक भी जीत चुकी हैं। मानसी ने बताया कि उन पर कृत्रिम पांव मुंबई में रिहैबिलिटेशन क्लिनिक में लगाया गया। वह जिस कृत्रिम पांव का उपयोग करती हैं उसमें सेंसर लगे हुए हैं। मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद ने कहा कि मानसी सक्षम लोगों के लिये भी प्रेरणास्रोत है। पैरा बैडमिंटन में पदक जीतने के काफी मौके होते हैं। मानसी काफी कड़ी मेहनत करती है। उसका जुझारूपन देखकर अच्छा लगता है। वह कई सक्षम लोगों के लिये भी प्रेरणा है। उम्मीद है कि वह अच्छा प्रदर्शन जारी रखेगी।’

मानसी ने कहा कि वह जिस कृत्रिम पांव का उपयोग करती है वह काफी महंगा है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार इसमें छूट देकर मदद करेगी। उन्होंने बताया कि कृत्रिम अंगों में हाल में पांच प्रतिशत का जीएसटी जोड़ा गया। मानसी ने कहा, ‘कृत्रिम पांव की कीमत 20 लाख रूपये है और प्रत्येक पांच साल में इसे बदलना पड़ता है तथा यह निश्चित तौर पर एक बोझ है भले ही आप कितने भी धनी हों।

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