उत्तराखंड: कुमाऊं समेत कई विश्वविद्यालयों ने किया इस साल के छात्रसंघ चुनावों को मना

गढ़वाल व कुमाऊं विवि में इस साल नहीं जबकि दून विश्वविद्यालय में हो सकते हैं छात्रसंघ चुनाव।

हल्द्वानी: ऐसा कोई काम नज़र नहीं आता जो कोरोना की चपेट में आ कर इस कोरोना काल में स्थगित ना हुआ हो। निचले स्तर से ले कर बड़े से बड़े स्तर तक के कार्यों को कोविड महामारी ने चोट पहुंचाई है। साल के इस वक्त तक उत्तराखंड के तमाम विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों की तैयारी शुरू कर दी जाती थी। मगर कोरोना के चक्कर से इस बार माहौल अलग है। इस साल डिग्री कॉलेज-विश्वविद्यालय कैम्पस में छात्रसंघ चुनाव गठित होने के आसार नहीं हैं। मौजूदा सत्र का साढ़े चार महीने का समय निकल चुका है। लेकिन, कॉलेजों में अभी तक छात्रों की आवाजाही पूर्व की तरह शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में दून विवि को छोड़कर बाकी कोई भी विश्वविद्यालय चुनाव को तैयार नजर नहीं आ रहा है। पिछले साल तक जुलाई में नए सत्र के लिए कॉलेज खुलने के साथ ही डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की विभिन्न तैयारियां शुरू हो जाती थी।

दरअसल लिंगदोह समिति के नियमों के अनुसार हर साल सितंबर के महीने में प्रदेश के कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने होते हैं। लेकिन, इस साल अब तक कॉलेज बंद होने के कारणवश चुनाव संभव नहीं हो पाए। श्री देव सुमन विवि के कुलसचिव दिनेश चंद्रा के मुताबिक, अभी कॉलेजों में एडमिशन तक पूरे नहीं हो पाए हैं, ऐसे में चुनाव कराना मुमकिन नहीं। हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलपति प्रो. रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव होंगे या नहीं, इस बात पर कॉलेज खुलने के बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा। जब तक केंद्र से चुनाव के लिए रज़ामंदी नहीं मिलता, चुनावों का आयोजन करना संभव नहीं है। बता दें कि विवि में करीब सात हजार छात्र पंजीकृत हैं। इसे अलावा 800 छात्रों वाले उत्तराखंड संस्कृत विवि में भी फिलहाल तो छात्रसंघ चुनाव के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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कुमाऊं विश्विविद्यालय में भी इस साल चुनावी प्रक्रिया होना असंभव माना जा रहा है। खुद विवि के कुलसचिव केआर भट्ट ने जानकारी दी और बताया कि छात्रसंघ चुनाव सितंबर में प्रस्तावित थे लेकिन कोरोना के चलते चुनाव नहीं कराए जा सके। जिसके बाद चुनाव के बारे में परिसरों तथा कॉलेजों से सुझाव भी मांगे गए थे। इस पर अंतिम निर्णय शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के क्रम में ही लिया जा सकेगा।

दून विवि समेत कुछ अन्य कॉलेज भी खुल गए हैं, धीरे धीरे छात्र भी आने लगेंगे। फिलहाल केवल दून विवि में चुनाव होना मुमकिन माना जा रहा है मगर सब निर्भर इस बात पर करेगा कि कितनी संख्या में छात्र कॉलेज आना शुरू करेंगे। अगर चुनाव नहीं हो पाते हैं तब ही किसी दूसरे विकल्प पर विचार होगा। इसके अलावा गढ़वाल विवि के बिड़ला, टिहरी, पौड़ी परिसर में भी सत्र 2020-21 में छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे। कोरोना महामारी के कारण विश्विविद्यालय ने पहले ही प्रवेश के दौरान लिए जाने वाले शुल्क में से छात्रसंघ चुनाव का शुल्क हटा दिया था। इसके अलावा वर्तमान में विवि में छात्रों की पढ़ाई ऑनलाइन मोड में चल रही है। छात्रों के लिए परिसर अभी बंद हैं।

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लिंगदोह कमेटी की नियमावली का पेंच फंस रहा है लेकिन ज़्यादातर कॉलेज फिलहाल चुनाव कराए जाने को ले कर तैयार नहीं हैं। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनंद वर्द्धन ने भी मामले पर जानकारी दी और बताया कि एक ही स्थिति में चुनाव हो सकते हैं और वह यह है कि कॉलेज खुलें और छात्रों का नियमित रूप से परिसरों में आना शुरू हो। मगर ऐसी स्थितियां फिलहाल नज़र नहीं आ रही हैं। उन्होंने कहा वैसे भी चुनाव कराने या न कराने पर अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय और कॉलेजों के स्तर से ही लिया जाना है।

ऐसे में आगे चल कर देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार या फिर केंद्र सरकार भी किस तरह से इस मामले को लेती है मगर कॉलेजों द्वारा चुनाव होना इस वक्त तो कतई भी मुमकिन नहीं माना जा रहा है।

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