हल्द्वानी: गौला में विसर्जित होंगी अटल जी की अस्थियां, शुरू होगा पवित्र अध्याय

हल्द्वानी: शहर में बहने वाली गौला नदी अपन नए पवित्र अध्याय की शुरूआत करने वाली है। गौला नदी में भारतीय राजनीति के सबसे बड़े हीरो पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि विसर्जित की जाएगी। पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्‍‌न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश शुक्रवार हल्द्वानी पहुंचेगा। बुधवार को भाजपा कार्यालय में अस्थि विसर्जन यात्रा की व्यवस्था को लेकर बैठक हुई। बता दें कि 24 अगस्त को अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि कलश जसपुर से कुमाऊं में प्रवेश करेगा। उसके बाद कई शहरों से होतें हुए वह हल्द्वानी पहुंचेगा जहां रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट में अस्थियां विसर्जित की जाएंगी।

भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट ने  बताया कि शुक्रवार दोपहर तीन बजे ट्रांसपोर्ट नगर, 3.50 में हिदू धर्मशाला रामपुर रोड, चार बजे दीनदयाल चौक तिकोनिया, 4.15 रामलीला मैदान शीशमहल, 4.30 बजे नारीमन चौक काठगोदाम पहुंचने के बाद पांच बजे यात्रा चित्रशिला घाट रानीबाग पहुंचेगी। जहां नदी में अस्थि विसर्जन होगा। बिष्ट ने बताया कि कार्यक्रम की व्यवस्था को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। बैठक में विधायक नवीन दुम्का, विधायक संजीव आर्य, गोविंद बिष्ट, बिंदेश गुप्ता, डॉ. अनिल कपूर डब्बू, प्रकाश हर्बोला, तरुण बंसल, प्रकाश रावत, चंदन बिष्ट, राकेश नैनवाल, संजय दुम्का, नितिन कार्की शामिल रहे। बता दें कि भाजपा बुधवार से पूरे देश में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा निकाल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अशोक रोड स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सभी राज्यों के भाजपा अध्यक्षों को अस्थि कलश सौंपा।

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, संगठन मंत्री रामलाल समेत कई केंद्रीय मंत्री और पार्टी के नेता मौजूद थे। वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य एवं परिवार के अन्य लोग भी मौजूद थे।

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स्व. अटल बिहारी वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। साल 2015 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। राजनीति में होने का बाद भी उनका विपक्षी दलों में सम्मान होता था, अटल जी की राजनीति में केवल देश को आगे बढ़ाने का मकसद था, उन्होंने इसके लिए कई बार विपक्षी दलों से भी सहयोग लिया था। वो भारत के पहले नेता है जिन्होंने देश को बताया कि मिलकर गंठबंधन की सरकार बनाई जा सकती है। अटल जी ने 16 अगस्त को दिल्ली स्थित एम्स में 5.15 मिनट में अंतिम सांस ली। 17 अगस्त को उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 19 अगस्त को हरिद्वार में उनकी अस्थियां गंगा जी में विसर्जित की गई।