भाड़ में जाए परेशानी, मुझे हासिल करनी है कामयाबी, कुछ ऐसी है उत्तराखण्ड की सोनाक्षी तोमर की कामयाबी की स्क्रिप्ट

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देहरादून: कामयाबी केवल एक चीज देखती है और वो है मेहनत। चाहे कुछ भी हो जाए कुछ लोग मेहनत के लिए सभी चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं। कामयाबी की स्क्रिप्ट दिखती अच्छी है लेकिन उसे लिखने में काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसी ही कहानी है उत्तराखण्ड की बेटी सोनाक्षी सिंह तोमर की। सोनाक्षी सिंह तोमर ने साल 2016 में आईएएस की परीक्षा उत्तीण कर राज्य में मिसाल पैदा की। ऐसा इसलिए सोनाक्षी बचपन से दिव्यांग (सुनने में दिक्कत)  हैं। लेकिन उन्होंने इस कमजोरी को अपनी कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया और राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा बनी। नैनीताल की छात्रा सोनाक्षी सिंह तोमर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 747वीं रेंक हासिल की। मूल रूप से पौड़ी जिले के तहसील लैंसडाउन स्थित ग्राम गुमखाल निवासी सोनाक्षी सिंह तोमर के पिता मुकेश तोमर वर्तमान में कुमाऊं मंडल विकास निगम नैनीताल के पर्यटन अनुभाग में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर तैनात हैं। वह एक शानदार क्रिकेट खिलाड़ी भी हैं। वहीं मां पुष्पा तोमर भारतीय स्टेट बैंक नैनीताल में स्पेशल असिस्टेंट हैं। सोनाक्षी अपने गांव की पहली आईएएस ऑफिसर हैं।

 

बता दें कि सोनाक्षी अपने स्कूल की शिक्षा नैनीताल से ग्रहण की। उन्होंने प्राथमिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सेंट मैरी कालेज से की। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली सोनाक्षी ने हाईस्कूल की परीक्षा में 91.3 फीसदी और इंटर की परीक्षा 92.3 फीसदी नंबर प्राप्त किए। इंटर में अच्छे नंबर लाने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र विषय में ऑनर्स करने का फैसला किया। उसके बाद दिल्ली ओपन यूनिवर्सिटी से एमए समाजशास्त्र किया। पहले प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की प्री परीक्षा उत्तीर्ण की। दूसरे प्रयास में प्री परीक्षा के साथ मुख्य परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी लेकिन इंटरव्यू में रह गईं। अब तीसरे प्रयास में उन्होंने कामयाबी हासिल कर ली। मौजूदा वक्त में सोनाक्षी त्रिपुरा में गोमती जिला के उदयपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात है।

नोट: हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं नजदीक हैं। इस लिहाज से हल्द्वानी लाइव डॉट कॉम ने सोनाक्षी के विषय पर आर्टिकल लिखा है। हमारा मकसद है कि छात्र इस तरह की कहानियों से अपने आप को परीक्षाओं से पहले प्रेरित कर सकें।