आधुनिक तकनीकों से होगा उत्तराखंड में सड़क निर्माण, मदद के लिए आगे आया DRDO

हल्द्वानी: अब प्रदेश की सड़कों को लाजवाब करने की तैयारियां हो चुकी हैं। बहुत जल्द आधुनिकता से लैस योजनाओं द्वारा सड़कों का निर्माण शुरू हो जाएगा। ऑलवेदर रोड परियोजना, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, उसे उत्तराखंड में साकार करने के लिए अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भी मदद करेगा। प्रदेश में तकरीबन 900 किमी की सड़कें इसी योजना के अंतर्गत बनाई जानी हैं। जिससे कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों में इस काम को नया आयाम मिलेगा।

गढ़वाल में चारधाम मार्ग के अलावा कुमाऊं में टनकपुर से चम्पावत के बीच 150 किलोमीटर निर्माणाधीन रोड में कई पर्वतीय हिस्से बेहद खतरनाक हैं। जिसकी वजह से निर्माण फाइनल करने की तिथि भी आगे खिसकने में लगी है। ऐसे में अब भारत सरकार की इस परियोजना में डीआरडीओ तकनीकी मदद करेगा। भूस्खलन, बर्फ के बीच निर्माण एवं बारिश से सड़क को नुकसान को कम करने में यह मदद काफी फायदेमंद साबित होगी।

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डीआरडीओ सचिव डा. सतीश रेड्डी के तकनीकी सलाहकार व वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. संजीव कुमार जोशी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस करार का लाभ उत्तराखंड को मिलेगा। आपको बता दें कि उत्तराखंड में विषम भौगोलिक परिस्थति वाले दुर्गम क्षेत्रों से आलवेदर रोड का निर्माण भी हो रहा है। जहां भूस्खलन से लेकर बर्फ वाले ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर दुर्घटनाओं का साया रहता है। इन समस्त जगहों पर डीआरडीओ की लैब अत्याधुनिक तकनीक की मदद से सड़क मार्ग के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाएगी और मजबूती भी प्रदान करने का काम करेगी।

डीआरडीओ की डिफेंस जीओ इंफारमेटिक्स रिसर्च इस्टेब्लिशमेंट (डीजीआरई) की हाइटेक लैब में तमाम तरह के स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए एक्सपेरीमेंट होते रहते हैं। डा. जोशी ने बताया कि संभावित भूस्खलन वाली जगहों पर तमाम तरह के पौधे उगाए जा सकते हैं जो कि मिट्टी को बांधे रखने के साथ तमाम खूबियों वाले हैं। इसके अलावा मजबूत स्ट्रक्चर बनाए जाते हैं, जिसे गैलरी कहते हैं। ऐसे ही एवलांच (हिमस्लखन) वाले जगहों पर भी स्नो गैलरीज बनाई जाती हैं। असल में हिमालयी पहाड़ कमजोर हैं, इसलिए उन जगहों पर मिट्टी का सर्वे कर सड़क निर्माण करने की तकनीक इस्तेमाल की जा सकती है।

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डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव कुमार जोशी ने बताया कि उत्तराखंड में चारधाम परियोजना अच्छी पहल है। इसमें डीआरडीओ तकनीकी सलाह देगा। ऐसे में साफ्टवेयर उद्योग या इलेक्ट्रानिक्स उद्योग जैसे प्रमुख उद्योगों को आगे बढ़ाने का सही समय है।

आपको बता दें कि उत्तराखंड राज्य में 10 मीटर की न्यूनतम चौड़ाई के साथ प्रस्तावित दो-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग है। परियोजना में लगभग 900 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं, जो पूरे उत्तराखंड राज्य को जोड़ेगा। इस परियोजना में कई सुरंगें और बर्फ की गैलरी बनाई जानी हैं।

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