उत्तराखंड को कोरोना वायरस के वजह से करोड़ो का नुकसान पहुंचा है। राज्य की आर्थिक मदद देने वाला पर्यटन सीजन पूरी तरह कोरोना वायरस के वजह से पीट गया है। अनलॉक के लागू होने के बाद दूसरे राज्यों के लोगों को एंट्री तो दी जा रही है लेकिन कुछ नियम ऐसे हैं जो होटल प्रबंधक के लिए परेशानी का विषय बन गए हैं।

नैनीताल के होटल एसोसिएशन चाहता है कि सरकार प्रदेश में कोरोना टेस्ट के नियमों को बदले और होटल में क्वारंटाइन के नियमों में भी ढील दे। फिलहाल अभी उत्तराखंड पहुंचने वाले पर्यटकों को अगर क्वांरटाइन के निमय से बचना है तो उन्हें 96 घंटे पहले की कोविड नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी पड़ रही है। ऐसा ना करने पर उन्हें होटल में 7 दिन के लिए क्वांरटाइन किया जा रहा है।

नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश लाल साह ने कहा कि अनलॉक-4 में दी गई छूट का लाभ होटल कारोबार को नहीं मिल पा रहा है। सरकार होटल कारोबारियों के लिए नियम सख्त कर रही है। इसके चलते कारोबारी होटल खोलने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों की बॉर्डर पर भी कोरोना जांच होनी चाहिए। होटल व्यवसायियों को भी नियमों में थोड़ी रियायत दी जानी चाहिए। यदि कोई पर्यटक कोरोना संक्रमित मिलता है तो पूरे होटल को सील करने का नियम भी गलत है।

कोविड केयर सेंटर सरकारी अस्पतालों में खुलने चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि होटल कब तक अधिग्रहीत रहेंगे। बिजली, पानी आदि टैक्सों में छूट देनी होगी। उन्होंने बताया कि अब तक होटल व्यवसायियों को अबतक लगभग 500 करोड़ का नुकसान हो चुका है और अगर आगे भी राज्य सरकार नियमों में होटल व्यवसायियो को राहत नही देती तो नैनीताल होटल व्यवसायी होटलों नहीं खोलेंगे।

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