गढ़ी कैंट को कामयाबी, कूड़े से जैविक खाद तैयार करने के प्लान को मिली सफलता

देहरादून: राजधानी देहरादून में अब कूड़े को ठिकाने लगाने का प्लान तैयार हो चुका है। गढ़ी कैंट बोर्ड ट्रंचिंग ग्राउंड में पड़े कूड़े-कचरे से जैविद खाद तैयार करेगा। यह खाद पार्कों में डालने के काम आएगी और इसे बेचकर बोर्ड राजस्व भी बनाएगा। इसके लिए दिल्ली की एक कंपनी को ठेका दिया गया है। कंपनी की ओर से प्रेमनगर ट्रंचिंग ग्राउंड में प्लांट लगाया गया है।

कंपनी की मानें तो दिसंबर से प्लांट में कचरे से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह प्लान अहर कामयाब होता है तो लंबे वक्त से आ रही है परेशानी से छुटकारा मिलेगा। बता दें कि मौजूदा वक्त में कैंट बोर्ड के दो ट्रंचिंग ग्राउंड हैं। एक प्रेमनगर तो दूसरा टपकेश्वर में। इस दोनों ट्रंचिंग ग्राउंड में प्रतिदिन पूरे कैंट क्षेत्र से 80 से 90 टन कूड़ा जमा होता है। दोनों ट्रंचिंग ग्राउंड कूड़े से फुल हो चुके हैं।

कूड़े के निस्तारण के लिए कैंट बोर्ड की नगर निगम से बात हुई थी लेकिन नगर निगम ने भी कैंट का कूड़ा अपने ट्रंचिंग ग्राउंड में फेंकने और निस्तारण से हाथ खड़े कर दिए। एनजीटी भी कैंट बोर्ड को अपने कूडे़-कचरे का निस्तारण करने का आदेश दे चुकी है।

इसके बाद बोर्ड ने ट्रंचिंग ग्राउंड में एकत्रित कूड़े से जैविक खाद तैयार करने प्लान बनाया। इसके लिए दिल्ली की एक कंपनी आकांक्षा इंटरप्राइजेज के साथ मॉडल पर बात हुई। कंपनी को बाद में प्लांट लगाने और खाद लगाने का ठेका दिया है। कंपनी ने प्रेमनगर ट्रंचिंग ग्राउंड में कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट तैयार कर लिया है। 

कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर जोवा पुजारी का कहना है कि प्लांट पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है। अभी बिजली का कनेक्शन नहीं हो पाया है, जो कैंट बोर्ड की ओर से होना है। यह कार्य होने के बाद प्लांट में काम शुरू हो जाएगा।

जैविक खाद बनाने के लिए जैविक कचरे में बैक्टीरिया मिलाकर उसे गला दिया जाता है। बैक्टीरिया के छिड़काव करने से वह 35 से 40 दिन में जैविक खाद के रूप में परिवर्तित हो जाता है। 100 किलो कूड़े से करीब 20 किलो खाद बनाया जाएगा। इस खाद को कैंट बोर्ड को सौंप दिया जाएगा।