गर्व की बात, 200 घंटे विमान चलाकर पहाड़ की बेटी ने रचा इतिहास

हल्द्वानी: एक बार फिर बेटी के परिश्रम ने देवभूमि उत्तराखण्ड नाम रोशन किया है। राज्य की बेटी ने अपनी कामयाबी से ना सिर्फ क्षेत्र का बल्कि देश का मान भी बढ़ाया है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ के सोन गांव की रहने वाली मुस्कान ने व्यावसायिक विमान उड़ाने का लाइसेंस हासिल कर ‘ऊंची उड़ान’ भरी है। उसकी यह सफलता राज्य व देशभर की सभी बेटियों के लिए उदाहरण भी है। उस सोच पर तमांचा है जो बेटियों की उड़ान को चार दिवारी के अंदर कैद करना चाहती है।मुस्कान ने 200 घंटे विमान उड़ाने का प्रशिक्षण पूरा कर व्यावसायिक विमान उड़ाने का लाइसेंस प्राप्त किया है। वो ऐसा करने वाली पहली महिला पायलट है। मुस्कान के पिता का नाम भूप सिंह सोनाल है। वह एसबीआई झारखंड में चीफ मैनेजर हैं। माता बसंती सोनाल गृहणी हैं। वहीं बहन ज्योत्स्ना डीयू में सहायक प्रवक्ता हैं। छोटा भाई पढ़ाई कर रहा है। मुस्कान सिंह सोनाल ने लखनऊ से वर्ष 2015 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। मुस्कान ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान एकेडमी रायबरेली से कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस  (सीपीएल) के लिए आवेदन किया।

एकेडमी में ढाई वर्ष के कठिन ट्रेनिंग के बाद उसने सीपीएल का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 200 घंटे तक विमान उड़ाने के बाद मुस्कान को व्यावसायिक फ्लाइट का लाइसेंस प्राप्त हुआ है जो पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। अपनी इस कामयाबी के बाद मुस्कान खुश हैं और भविष्य में वह भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहती है।

बता दें कि मुस्कान से पहले धारचूला के व्यास घाटी के गर्ब्यांग गांव निवासी माउंट एवरेस्ट विजेता योगेश सिंह ने भी कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया है। चौदास घाटी के सोसा निवासी अतुल सिंह ह्यांकी भी सेना में सुखोई जहाज उड़ा रहे हैं। मुस्कान की कामयाबी के बाद कल्याण संस्था के मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल और दिलिंग दारमा सेवा समिति के अध्यक्ष पूरन सेलाल ने कहा कि मुस्कान की इस सफलता से राज्य के अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी।